नौकरशाही में बढ़ रही है संकीर्णता! हरियाणा के IPS वाई. पूरन कुमार की मौत पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
हरियाणा के दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की मौत के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर शव मिलने के बाद भी अधिकारी के परिवार ने अभी तक पोस्टमार्टम के लिए अपनी सहमति नहीं दी है। हालांकि पुलिस इसे कथित आत्महत्या का मामला मान रही है, लेकिन परिवार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
डीजीपी और आईजी ने परिवार से की मुलाकात
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सागर प्रीत हुड्डा और महानिरीक्षक (आईजी) पुष्पेंद्र कुमार दिवंगत अधिकारी के परिवार से मिलने पहुँचे। पुलिस सूत्रों ने बताया, “परिवार की अनुमति मिलने के बाद, पोस्टमार्टम से पहले आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार का शव उन्हें दिखाया जाएगा। डॉक्टरों का एक विशेष पैनल ही पोस्टमार्टम करेगा।” हालांकि परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे भावनात्मक रूप से बहुत विचलित हैं और अंतिम संस्कार व जांच की प्रक्रिया को लेकर गहन चर्चा में हैं।
निष्पक्ष जांच के लिए SIT का गठन
आईपीएस अधिकारी की मौत की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने आईजी पुष्पेंद्र कुमार की देखरेख में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह टीम भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 और 3(5) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(R) के तहत दर्ज प्राथमिकी की जांच करेगी। टीम को “साक्ष्य एकत्र करने, गवाहों से पूछताछ करने और आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों की सहायता लेने की अनुमति दी गई है, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे।”
इस दुखद घटना पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि भारतीय नौकरशाही में संकीर्ण सोच और असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। एएनआई से बातचीत में रावत ने आरोप लगाया, “यह देखना बेहद चिंताजनक है कि आज नौकरशाही में कितनी संकीर्णता घुस गई है। सत्ता में बैठे लोग धर्म, जाति और भाषा के नाम पर विभाजन पैदा कर रहे हैं। हमने एक सक्षम पुलिस अधिकारी खो दिया जो इस माहौल का शिकार हो गया।”