बकरी पालन में सबसे उत्तम नस्ल ‘सिरोही’: ५ महीने में ही लागत से दो-तीन गुना हो जाएगी कमाई, जानिए खासियत

अगर पशुपालन की बात की जाती है, तो बकरी पालन में सबसे उत्तम किस्म की बकरियों में सिरोही (Sirohi) नस्ल की बकरी का नाम आता है। अगर आप भी बकरी पालन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, तो सिरोही नस्ल की बकरियां आपको अच्छा खासा मुनाफा दे सकती है। यह बकरी ५ से ६ महीने में ही लागत से दो से तीन गुना तक का मुनाफा दे सकती है। इस बकरी की नस्ल का यह नाम सिरोही जिले की वजह से पड़ा है, क्योंकि इस नस्ल की बकरियां सिरोही और आसपास के जिलों में ही ज्यादा पाई जाती है।

सिरोही नस्ल की विशेषताएं

पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगदेव चौधरी ने सिरोही नस्ल की बकरियों के फायदे बताए:

  • वजन और दूध: सिरोही नस्ल के बकरे का औसत वजन ५० से ६० किलोग्राम होता है। ये बकरियां रोजाना औसतन १ से डेढ़ लीटर दूध देती है।
  • प्रजनन: ये बकरियां साल में दो बार बच्चे देती हैं और इनके अधिकांश बच्चे जुड़वां होते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: डॉ. चौधरी ने बताया कि सिरोही नस्ल की बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है। इस वजह से यह नस्ल की बकरियां किसी भी माहौल में रह सकती है।

डॉ. चौधरी ने जोर देकर कहा कि अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण इन बकरियों के रखरखाव का खर्च कम आता है, जिससे छोटे पशुपालकों के लिए यह एक मुनाफे का सौदा साबित होता है।

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