पुलिस हैरान! गांजे की तस्करी में पकड़ा गया ‘मोहन सुंदर’, क्या अकेले काम कर रहा था मंदिर का यह पुजारी?
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के गुंटकल शहर में मंदिर के एक पुजारी को गांजा तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ उसके एक साथी को भी आबकारी विभाग (Excise Department) ने रंगेहाथों पकड़ा है। हालांकि, स्थानीय लोगों के लिए यह यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि मंदिर का एक पुजारी गांजा तस्कर निकलेगा।
आबकारी विभाग की टीम ने हनुमान सर्कल इलाके में छापा मारकर गांजा तस्करी में लिप्त पुजारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया। उनके पास से चार किलो गांजा और तस्करी में इस्तेमाल की गई बाइक जब्त की गई है।
4 किलो गांजा जब्त, रंगेहाथों हुई गिरफ्तारी
सूत्रों के मुताबिक, आबकारी टीम को पहले से सूचना मिली थी कि कुछ लोग इस क्षेत्र में अवैध रूप से गांजा की सप्लाई कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर अधिकारियों ने कार्रवाई की। जब टीम ने मौके पर छापा मारा, तो दो व्यक्ति वहां गांजा की खेप सौंपने की तैयारी कर रहे थे। दोनों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी में उनके पास से चार किलो गांजा मिला।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहन सुंदर और साई कुमार के रूप में हुई है। मोहन सुंदर पश्चिम गोदावरी जिले के वेंकटपुरम गांव का निवासी है और गुथी मंडल के अभय डोड्डी गांव के एक मंदिर में पुजारी है। वहीं दूसरा आरोपी साई कुमार गुथी शहर के एससी कॉलोनी का रहने वाला है। दोनों को पूछताछ के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
खर्च नहीं चलने पर चुना अवैध रास्ता
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि पुजारी मोहन सुंदर पिछले कुछ समय से मंदिर में पुजारी की सेवा के साथ-साथ गांजा बेचने का भी काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि मंदिर में मिलने वाला चढ़ावा बहुत कम होता था, जिससे उसका खर्च नहीं चल पा रहा था। इसलिए उसने अवैध रूप से गांजा तस्करी शुरू कर दी। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि वह स्थानीय स्तर पर गांजा खरीदकर आसपास के इलाकों में छोटे पैमाने पर बेचता था।
पुलिस को अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि उसे यह गांजा कहां से मिलता था और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं। आबकारी अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पुजारी अकेले यह काम कर रहा था या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा था।
इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि एक पुजारी, जिस पर समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने का दायित्व होता है, अगर वही नशे के कारोबार में शामिल हो जाए तो यह बेहद शर्मनाक है और विश्वास तोड़ने वाला है।