भरतपुर की संस्कृति: पिज्जा-बर्गर की दुनिया में भी कैसे कायम है ₹30-50 प्लेट वाले इस देसी नाश्ते का जलवा?

भरतपुर शहर के कलेक्ट्रेट के पास लगने वाला मशहूर कांजी बड़ा वाला ठेला पिछले करीब 45 वर्षों से स्थानीय लोगों और सरकारी अधिकारियों की पहली पसंद बना हुआ है। यह जगह सिर्फ एक खाने का ठेला नहीं, बल्कि एक स्वाद का केंद्र है, जहां सुबह से शाम तक ग्राहकों की लंबी कतार लगी रहती है। सरकारी अधिकारी हों या शहर का आमजन, हर कोई यहां के मसालेदार पानी और अनोखे स्वाद का दीवाना है। यह स्वाद पीढ़ी दर पीढ़ी भरतपुर की पहचान बन चुका है।

इस खास स्वाद के पीछे की मेहनत और सीक्रेट रेसिपी चिनुआ ठाकुर की है, जो पिछले साढ़े चार दशकों से इस ठेले को चला रहे हैं। चिनुआ ठाकुर बताते हैं कि उनके कांजी बड़े का असली जादू उनके खास मसालों और राई (सरसों) से तैयार किए गए खट्टे-तीखे पानी में छिपा है। यही विशिष्ट स्वाद लोगों को बार-बार उनके ठेले की ओर खींच लाता है।

स्वाद ही नहीं, पेट की सेहत का भी ख्याल

चिनुआ ठाकुर दावा करते हैं कि लोग सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि पेट की सेहत के लिए भी कांजी बड़ा पीते हैं। राई, हींग और मसालों का यह अद्भुत मिश्रण पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। गर्मी के दिनों में तो यह मसालेदार और हल्का खट्टा पानी शरीर को तुरंत ठंडक देने और तरोताजा रखने का काम करता है।

यह ठेला 30 से 50 रुपए प्रति प्लेट में परोसा जाता है, लेकिन हर प्लेट में स्वाद की ताजगी इतनी गहरी होती है कि यह मुंह में लंबे समय तक बनी रहती है।

सिर्फ नाश्ता नहीं, यह है भरतपुर की परंपरा

कांजी बड़ा अब केवल एक साधारण नाश्ता नहीं रह गया है, बल्कि यह भरतपुर की पुरानी परंपरा और स्वाद की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा बन चुका है। स्थानीय लोग एकमत से मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति भरतपुर आए और कलेक्ट्रेट के पास वाले इस जादुई कांजी बड़े का स्वाद न ले, तो उसकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। यहां आने वाले देश-विदेश के सैलानी (पर्यटक) भी इस देसी स्वाद का आनंद लेने जरूर आते हैं।

कई पुराने ग्राहक तो इस स्वाद को अपने बचपन की सुनहरी यादों से जोड़ते हैं। वे कहते हैं कि कांजी बड़े का असली और पारंपरिक स्वाद अगर कहीं मिलता है, तो वह केवल भरतपुर में ही है।

देसी स्वाद का ठिकाना: फास्ट फूड की दुनिया में भी लोकप्रिय

आज जब बाजार में पिज्जा, बर्गर और नूडल्स जैसे तरह-तरह के फास्ट फूड मौजूद हैं, तब भी चिनुआ ठाकुर का यह ठेला भरतपुर के लोगों के लिए देसी स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक भोजन का एक महत्वपूर्ण ठिकाना बना हुआ है। यह प्रमाणित करता है कि असली और गुणवत्तापूर्ण देसी स्वाद की लोकप्रियता कभी कम नहीं होती। चिनुआ ठाकुर की मेहनत और उनके कांजी बड़े की शुद्धता ने ही इस ठेले को 45 वर्षों से एक सफल व्यावसायिक परंपरा के रूप में स्थापित किया है। यह कहानी न केवल स्वाद की है, बल्कि स्थानीय उद्यम और जुनून की भी है, जिसे भरतपुर के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला है।

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