WHO की चौंकाने वाली रिपोर्ट: हर 6 में से 1 बैक्टीरियल इन्फेक्शन पर एंटीबायोटिक हुई बेअसर, 5 साल में 40% बढ़ा रेजिस्टेंस।
दुनियाभर में जैसे-जैसे बीमारियों की नई दवाएं डेवलप हो रही हैं, वैसे-वैसे बैक्टीरिया और वायरस भी अपना स्वरूप बदल रहे हैं। कई बैक्टीरिया अब दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट (प्रतिरोधी) हो गए हैं, यानी उन पर एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं करती हैं। ऐसी कंडीशन में ऐसे इंफेक्शंस का इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है और लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
जब बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीव एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रेजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं, तो वे उन दवाओं से नहीं मरते नहीं हैं, जिनसे पहले आसानी से मर जाते थे। यह समस्या अक्सर तब बढ़ती है, जब लोग बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार या अधूरी एंटीबायोटिक दवाएं लेते हैं। यह समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है।
WHO की रिपोर्ट: ग्लोबल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस सर्विलांस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया है कि दुनियाभर में हर 6 में से 1 बैक्टीरियल इंफेक्शन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो गए हैं। आसान भाषा में कहें, तो एंटीबायोटिक दवाएं इन संक्रमणों पर बेअसर हो गई हैं।
- बढ़ोतरी: साल 2018 से 2023 के बीच एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस 40% से ज्यादा एंटीबायोटिक कॉम्बिनेशन पर बढ़ा है।
- विकास दर: यह रेजिस्टेंस हर साल औसतन 5 से 15% की दर से बढ़ रहा है।
- आधार: यह रिपोर्ट WHO के ग्लोबल एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस एंड यूज सर्विलांस सिस्टम (GLASS) द्वारा 100 से अधिक देशों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।
किन संक्रमणों पर है खतरा?
WHO की इस रिपोर्ट में 22 एंटीबायोटिक्स के रेजिस्टेंस रेट का आकलन किया गया है, जो यूरिनरी ट्रैक्ट, गट, ब्लड स्ट्रीम और गोनोरिया के संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होते हैं। इसमें 8 सामान्य बैक्टीरियल रोगजनकों को शामिल किया गया है:
- एसीनेटोबैक्टर (Acinetobacter)
- एसचेरिचिया कोली (Escherichia coli)
- क्लेब्सिएला न्यूमोनिया (Klebsiella pneumoniae)
- नाइसैरिया गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae)
- नॉन-टाइफॉयडल सालमोनेला (Non-typhoidal Salmonella)
- शिगेला (Shigella)
- स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus)
- स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया (Streptococcus pneumoniae)
ये सभी संक्रमणों से जुड़े हुए हैं और इन पर बढ़ता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सभी के लिए चिंता का विषय है। विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की दर अलग-अलग है।