वोट बैंक की राजनीति या सेक्युलर छवि? विधायक जगताप के विवादास्पद बोल से खतरे में एनसीपी का अल्पसंख्यक आधार

एनसीपी विधायक संग्राम अरुण जगताप के विवादित बयानों को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अब सख्त रुख अपना रही है। पिछले हफ्ते जगताप ने हिंदुओं को केवल हिंदू दुकानदारों से ही सामान खरीदने की अपील की थी। इस बयान पर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने तुरंत संज्ञान लिया और जगताप को नोटिस भेजते हुए महाराष्ट्र में सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

हालांकि, पार्टी से कारण बताओ नोटिस मिलने के बावजूद जगताप अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने सफाई दी है कि सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि दूसरे समुदाय को ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही नोटिस का जवाब देंगे। जगताप की यह टिप्पणी उनके निर्वाचन क्षेत्र अहिल्यानगर में ‘आई लव मुहम्मद’ को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सांप्रदायिक तनाव और हिंसक झड़पों के कुछ दिनों बाद आई थी।

नोटिस के बाद भी मुस्लिम समुदाय पर निशाना

पार्टी से कारण बताओ नोटिस मिलने के बावजूद एनसीपी विधायक संग्राम जगताप मंगलवार को अहिल्यानगर में एक बार फिर भड़काऊ बयान देते दिखे। उन्होंने मुस्लिम समुदाय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि हिंदू महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामलों के लिए ‘जिहादी’ जिम्मेदार हैं।

विधायक जगताप की ऐसी लगातार विवादास्पद बयानबाजी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, जो उसे गठबंधन सहयोगी बीजेपी और शिवसेना से अलग रखती आई है। अजित पवार का जाति और धर्म से जुड़े समावेशी वोट बैंक पर भरोसा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक समुदायों का समर्थन हासिल करने में निर्णायक साबित हुआ था। ऐसे में, पार्टी सुप्रीमो अजित पवार को अपनी धर्मनिरपेक्ष साख बचाने के लिए विधायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और साथ ही हिंदू समुदाय को नाराज किए बिना एक उचित संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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