1000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च: आवास, स्वास्थ्य और आजीविका से केरल ने तोड़ा गरीबी का चक्रव्यूह
केरल अब देश के उन राज्यों में शामिल होने जा रहा है जो अपनी जनता को ‘अत्यंत गरीबी मुक्त’ घोषित करेगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में केरल को आधिकारिक तौर पर ‘अत्यंत गरीबी मुक्त’ राज्य घोषित करेंगे।
मंत्री एम.बी. राजेश और वी. शिवनकुट्टी ने जानकारी दी कि कुडुंबश्री (Kudumbashree) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह पाया गया कि 64,006 अत्यंत गरीब परिवारों में से शेष 59,727 परिवार अब गरीबी मुक्त हो चुके हैं। यह उपलब्धि इसलिए संभव हो पाई क्योंकि इन परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, सहायता और समर्थन के माध्यम से गरीबी से बाहर निकाला गया।
गरीबी उन्मूलन का विशेष मॉडल
उन परिवारों को ‘अत्यंत गरीब’ माना जाता था जिनके पास भोजन, स्वास्थ्य, आजीविका और आवास जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं थीं। इनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष ‘सूक्ष्म-योजना’ (Micro-Plan) तैयार की गई थी।
इस योजना के तहत, इन परिवारों को लक्षित सहायता और सेवाएं देना सुनिश्चित किया गया। इस प्रयास में बड़े पैमाने पर सरकारी विभागों, स्वयंसेवकों और आम जनता का सहयोग मिला।
सरकारी योजनाएं और खर्च का विवरण:
सरकार ने इस पहल पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
- 21,263 लोगों को मालिकाना हक के दस्तावेज़ (जमीन के पट्टे) दिए गए।
- 18,438 परिवारों को 2022 से खाद्य किट और 2,210 परिवारों को पका हुआ भोजन मिल रहा है।
- 29,427 परिवारों के 85,721 लोगों को बेहतर इलाज और दवाइयां दी गईं।
- 4,394 परिवारों को आजीविका सहायता दी गई।
- ‘LIFE आवास परियोजना’ के तहत 4,689 परिवारों को घर आवंटित किए गए।
- 3,467 परिवारों को रोज़गार गारंटी कार्ड और 2,791 परिवारों को ज़मीन दी गई।
- 660 परिवारों को आवास पुनर्निर्माण के लिए दो-दो लाख रुपये आवंटित किये गये।
- 2,323 बच्चों और 554 छात्रों को केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई।
केरल की यह उपलब्धि देश के बाकी राज्यों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत साबित होगी।