शीतकाल के लिए बंद हुए बाबा केदारनाथ के कपाट: भैया दूज के पावन पर्व पर हुई विदाई

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित भगवान शिव के धाम केदारनाथ के कपाट बृहस्पतिवार को भैया दूज के पावन पर्व पर विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब सर्दियों के अगले छह माह तक भगवान केदारनाथ की पूजा उनके शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ में की जाएगी।

  • कपाट बंद होने का समय: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि विशेष पूजा-अर्चना के बाद बाबा केदार के कपाट सुबह साढ़े आठ बजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
  • उपस्थिति: कपाट बंद होने के अवसर पर ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम बोले’ के जयघोष के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत सैकड़ों श्रद्धालु, प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित मौजूद थे।
  • उत्सव डोली का प्रस्थान: कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली समारोह के साथ उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई।
    • बृहस्पतिवार रात: डोली का प्रवास रामपुर में होगा।
    • शुक्रवार: डोली गुप्तकाशी पहुंचेगी।
    • 25 अक्टूबर: डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
  • दर्शनार्थियों का आँकड़ा: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बुधवार शाम सात बजे तक 17,57,380 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके थे।
  • कपाट खुलने की तिथि: केदारनाथ मंदिर के कपाट अब अगले वर्ष अप्रैल–मई में श्रद्धालुओं के लिए फिर से खुलेंगे। इसकी तिथि और मुहूर्त महाशिवरात्रि के पर्व पर तय किया जाएगा।

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