LAC के करीब भारत की आखिरी चौकी तक सड़क! सबसे कठिन सीमा पर ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के 18 वर्षों की अविश्वसनीय दास्तान

LAC के करीब भारत की आखिरी चौकी तक सड़क! सबसे कठिन सीमा पर ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के 18 वर्षों की अविश्वसनीय दास्तान

भारत की पूर्वी सीमाओं पर कठिन और दुर्गम इलाकों में काम करने वाले बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ (Project Arunank) ने आज नाहरलगुन में अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया। यह दिन अरुणाचल प्रदेश के सुदूर और पर्वतीय इलाकों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने वाले BRO के समर्पण, साहस और इंजीनियरिंग कौशल का प्रतीक है।

18 वर्षों में अरुणाचल को क्या मिला?

वर्ष 2008 में स्थापित, ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ का उद्देश्य अरुणाचल की घाटियों और सीमावर्ती इलाकों को राष्ट्रीय मुख्य सड़कों से जोड़ना और सशस्त्र बलों की परिचालन जरूरतों को पूरा करना था। पिछले 17 वर्षों में इस प्रोजेक्ट ने 696 किलोमीटर से अधिक सड़कों और 1.18 किलोमीटर लंबे पुलों का निर्माण और रख-रखाव किया है। ये सड़कें सेना और स्थानीय नागरिकों दोनों के लिए हर मौसम में कनेक्टिविटी बनाए रखने वाली जीवनरेखा साबित हुई हैं।

प्रोजेक्ट अरुणांक की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक ली–हुरी रोड का निर्माण रहा, जिसने कुरुंग कुमेय जिले के सबसे दुर्गम इलाकों को जोड़ा। 278 किलोमीटर लंबी हापोली–सारली–हुरी सड़क को पहली बार आज़ादी के बाद ब्लैकटॉप किया गया, जिसे BRO के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना गया।

LAC के पास भारत की अंतिम चौकी तक संपर्क

हाल के वर्षों में प्रोजेक्ट ने कई रणनीतिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि 28 दिसंबर 2022 को BRO ने अरुणाचल प्रदेश की अंतिम चौकी ‘माज़ा’ (Maza) तक सड़क संपर्क स्थापित किया, जो लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के बेहद करीब स्थित है। इसके अलावा, TCC–टाकसिंग रोड इसी वर्ष पूर्ण किया गया है। इन सड़कों से भारतीय सेना की गतिशीलता और सीमा सुरक्षा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

BRO प्रोजेक्ट अरुणांक ने निर्माण कार्य में आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों को अपनाकर एक नई दिशा दी है। स्टील स्लैग, जियो सेल्स, गेबियन वॉल और जीजीबीएफएस कंक्रीट जैसी तकनीकों के उपयोग से सड़कें न केवल मजबूत, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और किफायती भी बनी हैं।

सड़क सुरक्षा और हरित भविष्य का संकल्प

स्थापना दिवस के अवसर पर BRO ने नाहरलगुन–जोरम टॉप–संग्राम–ज़ीरो–नाहरलगुन मार्ग पर एक मोटरेबल एक्सपेडिशन का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा और ट्रैफ़िक अनुशासन को बढ़ावा देना था। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी BRO ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत अरुणाचल प्रदेश में 23,850 पौधे लगाकर अपने हरित और टिकाऊ विकास के संकल्प को बल दिया है।

BRO अपने कामगारों (CPLs) के लिए बेहतर और इंसुलेटेड शेल्टर, सुरक्षात्मक कपड़े, उन्नत विंटर गियर और नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर जैसी विशेष कल्याण योजनाएँ भी चला रहा है, जो संगठन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ अपने 18वें वर्ष में प्रवेश करते हुए राष्ट्रीय गर्व, रक्षा तत्परता और विकास की भावना को एक साथ दर्शाता है। यह BRO के आदर्श वाक्य “श्रमेण सर्वं साध्यम्” — यानी “मेहनत से सब कुछ संभव है” — को पूरी तरह साकार करता है।

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