‘पौष पर्व’ नहीं, अब ‘बुक फेस्टिवल’! भारत के पहले डाकघर की ऐतिहासिक भूमि खेजुरी में शुरू हुआ पांच दिवसीय क्षेत्रीय पुस्तक उत्सव

‘पौष पर्व’ नहीं, अब ‘बुक फेस्टिवल’! भारत के पहले डाकघर की ऐतिहासिक भूमि खेजुरी में शुरू हुआ पांच दिवसीय क्षेत्रीय पुस्तक उत्सव

पौष पर्व या पीठा-पुली पर्व की तरह ही, अब त्योहार के माहौल में ‘बुक फेस्टिवल’ (Boi Parbon)। भारत के पहले डाकघर के इतिहास से जुड़े पूर्वी मेदिनीपुर के खेजुरी (Khejuri) इलाके में स्थानीय बुद्धिजीवियों की पहल पर यह अनोखा उत्सव शुरू हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्तमान पीढ़ी खेजुरी के प्राचीन इतिहास और संस्कृति को न भूले।

खेजुरी इतिहास संरक्षण समिति की पहल पर स्थानीय संगठनों और पत्र-पत्रिकाओं के सहयोग से यह ‘पुस्तक पर्व उत्सव’ लगातार पांच वर्षों से मनाया जा रहा है। यह उत्सव हर साल दीपावली (Diwali) से शुरू होता है और पांच दिनों तक चलता है। इस उत्सव में खेजुरी की क्षेत्रीय किताबों को प्रमुखता दी जाती है।

खेजुरी के बांसगोड़ा में आयोजित इस उत्सव में रोजाना बच्चे और युवा से लेकर बड़े तक, सभी अपनी क्षेत्रीय इतिहास की किताबें खरीदने आ रहे हैं। आयोजक संस्था के प्रमुख सदस्य जयदेव माइती ने बताया, “पुस्तक पर्व केवल पढ़ने का त्योहार नहीं है, यह हमारे इतिहास को संरक्षित करने और स्थानीय संस्कृति को पहचान दिलाने का एक अनूठा प्रयास है।”

पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पुस्तक प्रदर्शनी, बिक्री, नई पुस्तकों का विमोचन, बाल कला दीर्घा (आर्ट गैलरी), सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, बाल सम्मेलन और साहित्य गोष्ठी जैसे कई कार्यक्रम शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय विरासत और क्षेत्रीय साहित्य के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

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