शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा कवच वापस ली गई! कोर्ट ने कहा,अंतरिम आदेश अनिश्चित काल तक नहीं चल सकता

शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा कवच वापस ली गई! कोर्ट ने कहा,अंतरिम आदेश अनिश्चित काल तक नहीं चल सकता

राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Election) से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को दी गई सुरक्षा कवच (Protection) को वापस ले लिया है। जस्टिस जय सेनगुप्ता ने जस्टिस राजशेखर मंथा द्वारा 2022 में दिए गए अंतरिम निर्देश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस जय सेनगुप्ता ने अपनी टिप्पणी में कहा कि शुभेंदु के खिलाफ सुरक्षा कवच का जो आदेश था, वह एक अंतरिम निर्देश था और कोई भी अंतरिम निर्देश अनिश्चित काल तक जारी नहीं रह सकता। इस फैसले के परिणामस्वरूप, अब राज्य सरकार को शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के लिए अदालत की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने साथ ही विरोधी दल के नेता के खिलाफ दर्ज 15 मामलों को भी खारिज कर दिया है। इसके अलावा, अदालत ने मानिकतला सहित कुल पांच मामलों में सीबीआई (CBI) और राज्य की संयुक्त एसआईटी (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें राज्य पुलिस और सीबीआई दोनों की तरफ से समान प्रतिनिधि होंगे।

सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष की खींचतान: राजनीतिक गलियारों के अनुसार, हाईकोर्ट के इस फैसले से विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की मुश्किलें थोड़ी बढ़ गई हैं। फैसले की घोषणा होते ही तृणमूल सांसद और वकील कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “वह कोर्ट से सुरक्षा कवच लेकर जो चाहे कर रहे थे। पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं कर पाती थी।” उन्होंने शुभेंदु को “बड़ा मस्तान” भी करार दिया और भविष्य में और मामलों का संकेत दिया।

कल्याण के हमले के जवाब में शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा, “तृणमूल बेकार में नाच रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ‘जेहादी सरकार’ द्वारा उनके खिलाफ दर्ज किए गए सभी झूठे मामलों को अदालत ने या तो खारिज कर दिया है या उन पर रोक लगा दी है। विपक्षी नेता के अनुसार, “यह फैसला मेरे लिए कोई नकारात्मक फैसला नहीं है।” बीजेपी नेता और कानूनी विशेषज्ञ तापस राय ने भी फैसले की व्याख्या करते हुए कहा कि सुरक्षा कवच वापस लेने को लेकर हो-हल्ला करना गलत व्याख्या है।

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