लालू परिवार में ‘भाई बनाम भाई’ की जंग सड़क पर आई: महनार में प्रदर्शन के बाद तेज प्रताप का बड़ा हमला- ‘जननायक वो जो जनता के बीच जाए!’

बिहार के महनार विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा करने पहुंचे लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के समर्थकों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। महनार के हीरानंद उच्च विद्यालय परिसर में जब तेज प्रताप अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) के उम्मीदवार के लिए जनसभा को संबोधित कर रहे थे, तभी RJD समर्थक उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

भीड़ में मौजूद लोगों ने लगातार ‘तेजस्वी यादव जिंदाबाद’ और ‘लालटेन छाप जिंदाबाद’ के नारे लगाए, जिसके कारण तेज प्रताप के काफिले को सभा स्थल से खदेड़ना पड़ा। तेज प्रताप हेलीकॉप्टर से सभा स्थल पहुंचे थे, लेकिन हेलीकॉप्टर वापस लौट जाने के कारण उन्हें सड़क मार्ग से महुआ की ओर जाना पड़ा, जहां यह विरोध और बढ़ गया।

RJD उम्मीदवार पर ‘करोड़ों में टिकट खरीदने’ का आरोप

JJD उम्मीदवार जय सिंह राठौर, जिनके समर्थन में तेज प्रताप प्रचार करने पहुंचे थे, उन्होंने इस पूरी घटना के लिए RJD उम्मीदवार रविंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहराया। राठौर ने आरोप लगाया कि यह पूरी साजिश RJD समर्थकों द्वारा रची गई थी ताकि सभा में माहौल बिगाड़ा जा सके।

उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि रविंद्र सिंह ने करोड़ों रुपए खर्च करके पार्टी का टिकट खरीदा है और चुनाव जीतने के लिए पैसे और शराब का इस्तेमाल कर रहे हैं। राठौर के मुताबिक, यह सब ‘जंगलराज’ को वापस लाने की कोशिश है, लेकिन जनता अब सब जान चुकी है। उन्होंने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग भी की है।

पारिवारिक कलह सार्वजनिक: तेजस्वी पर तेज प्रताप का सीधा निशाना

यह घटना लालू यादव के परिवार में चल रहे अंदरूनी तनाव को खुलेआम उजागर करती है। तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद और गहरे होते जा रहे हैं।

तेज प्रताप पहले ही तेजस्वी पर यह कहते हुए निशाना साध चुके हैं कि वे लालू प्रसाद यादव की छत्रछाया में रहकर खुद को ‘जननायक’ बताते हैं, जबकि सच्चा जननायक वही होता है जो जनता के बीच जाकर उनके लिए काम करे। चुनावी प्रचार को लेकर भी दोनों भाइयों के बीच तल्खी चरम पर है। तेज प्रताप ने स्पष्ट कहा था कि अगर तेजस्वी उनके क्षेत्र महुआ में प्रचार करने आएंगे, तो वे भी राघोपुर जाकर प्रचार करेंगे। महनार की घटना ने साफ कर दिया है कि यह पारिवारिक लड़ाई अब राजनीतिक मैदान में हिंसक रूप ले रही है।

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