‘जीत का जश्न या मौत का विरोध?’ बारसात में प्रदीप कर की मौत पर डीजे बजाकर और गुलाल लगाकर निकली रैली, राज्यभर में आलोचना
दिवंगत कार्यकर्ता प्रदीप कर की मौत के विरोध में बारसात में आयोजित एक रैली को लेकर राज्य की राजनीति में तीखा विवाद और आलोचना शुरू हो गई है। आरोप है कि इस विरोध रैली में तेज़ आवाज़ में डीजे (DJ) बजाया गया और रैली में शामिल लोगों ने गुलाल (अबीर) खेला। वायरल हुए वीडियो में यह समझना मुश्किल है कि यह ‘जीत का जश्न था या मौत के विरोध में शोक यात्रा’।
वीडियो में क्या दिखा:
बारसात की इस रैली के वायरल वीडियो में देखा जा सकता है—
- रैली में शामिल लोग ज़ोरदार नाच रहे हैं।
- तेज़ आवाज़ में डीजे बज रहा है।
- प्रतिभागी एक-दूसरे को गुलाल लगा रहे हैं।
जहाँ एक कार्यकर्ता की मौत पर शोक और विरोध का माहौल होना चाहिए था, वहीं इस तरह के जश्न वाले दृश्यों को देखकर आम जनता और राजनीतिक गलियारों के एक वर्ग ने कड़ी आलोचना की है। कई लोगों ने सवाल किया है कि यह मृतक के प्रति किस तरह का सम्मान है?
व्यापक आलोचना:
इस वीडियो के वायरल होने के बाद राज्य के विभिन्न हलकों से आलोचना का सैलाब उमड़ पड़ा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने टिप्पणी की है कि इस तरह का व्यवहार राजनीतिक दल की संस्कृति और मृतक के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।
- मकसद पर सवाल: लोगों का सवाल है कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य क्या था—कार्यकर्ता की मौत का विरोध करना, या कोई विशेष राजनीतिक संदेश देना?
- संवेदनशीलता की कमी: जब मृत कार्यकर्ता का परिवार गहरे शोक में डूबा है, ठीक उसी समय डीजे बजाकर आनंदोत्सव की तरह विरोध प्रदर्शन करना ‘चरम असंवेदनशीलता’ माना जा रहा है।
हालांकि, इस घटना को लेकर संबंधित राजनीतिक दल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।