‘डॉक्टर’ की आड़ में दहशतगर्दी! अल-फलाह यूनिवर्सिटी का डॉ. मुजम्मिल कैसे बना आतंकी मॉड्यूल का ‘मास्टरमाइंड’?

हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) से जुड़े डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। इस कड़ी में कश्मीरी डॉक्टर और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल (Dr. Muzammil) के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सीएनएन-न्यूज़18 के सूत्रों के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल और उनके साथी डॉ. उमर (Dr. Umar) और डॉ. मुजफ्फर (Dr. Muzaffar) भी इस व्हाइट-कॉलर टीम का हिस्सा थे, जो अपनी मेडिकल ड्यूटी की आड़ में हरियाणा के किराए के घरों में भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार जमा करते थे।

मुजम्मिल कैसे बना मॉड्यूल की ‘रीढ़ की हड्डी’?

सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज़18 को बताया कि मंसूर, हाशिम और उकाशा नामक विदेशी हैंडलर्स ने कथित तौर पर डॉ. मुजम्मिल और उनके नेटवर्क को विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति, खरीद और गुप्त रूप से प्रशिक्षण दिया था। मुजम्मिल की भूमिका सिर्फ भर्ती तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने पूरे मॉड्यूल की रणनीति बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। जहाँ डॉ. उमर और अन्य जल्दबाजी में हमले करना चाहते थे, वहीं मुजम्मिल ने इसका विरोध किया। मुजम्मिल ने एक सुरक्षित और कुशल नेटवर्क की योजना बनाने पर जोर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि उमर की लापरवाही से पूरा मॉड्यूल बेनकाब हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, उनके शांत और व्यवस्थित दृष्टिकोण ने उन्हें डॉ. उमर मॉड्यूल की रीढ़ की हड्डी बना दिया।

शिक्षित मुस्लिमों को ही क्यों करता था भर्ती?

पूछताछ के दौरान, मुजम्मिल ने खुलासा किया कि वह जानबूझकर डॉक्टर, इंजीनियर और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों जैसे शिक्षित मुस्लिमों की भर्ती पर ध्यान केंद्रित करता था। उसका मानना था कि वे बिना किसी संदेह के किसी भी संस्थान में छिप सकते हैं। कथित तौर पर, उसके विदेशी हैंडलर्स ने भी इस विश्वास को मजबूत किया कि बुद्धिजीवियों की भर्ती ही ‘जिहाद का भविष्य’ है। वह अपने प्रचार और भर्ती के लिए फरजदानी दारुल उलूम देवबंद और काफिला-ए-गुरबा जैसे टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल करता था।

अस्पताल परिसर को बनाया ‘विस्फोटकों का गोदाम’

अल-फलाह के भीतर मुजम्मिल का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। उसकी शैक्षणिक वरिष्ठता ने उसे प्रशिक्षुओं और जूनियर डॉक्टरों पर हावी होने में मदद की। सूत्रों ने बताया कि उसका परिवार उसकी गुप्त गतिविधियों से पूरी तरह अनजान था। मुजम्मिल हरियाणा में ‘सेफ हाउस’ किराए पर लेने में मदद करता था और अपनी अस्पताल की ड्यूटी व अंतर-राज्यीय यात्राओं का उपयोग गोला-बारूद के परिवहन के लिए करता था। उसने खुद को डॉक्टर के रूप में पेश करते हुए अस्पताल परिसर को विस्फोटक सामग्री का गोदाम बना दिया था। फरीदाबाद पुलिस ने दावा किया कि उसके किराए के परिसर में भारी मात्रा में विस्फोटक छिपाए गए थे और आतंकी योजना से जुड़ी एक मारुति ब्रेजा (Maruti Brezza) कार उसने और सह-आरोपी डॉ. शाहीन सईद ने कुछ ही हफ्ते पहले नकद में खरीदी थी।

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