SIR के दबाव में मौतें, TMC के कुणाल घोष ने चुनाव आयोग को ‘यमराज का दफ्तर’ बताया

कोलकाता: वोटर लिस्ट के गहन संशोधन (SIR) के काम के दौरान राज्य में कई मौतों की घटनाओं को लेकर तृणमूल के राज्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने टिप्पणी की कि चुनाव आयोग का दफ्तर अब ‘यमराज के दफ्तर’ में बदल गया है।

चुनाव आयोग के खिलाफ मुख्य आरोप:

  • दूरदर्शी और पक्षपातपूर्ण निर्णय: कुणाल घोष ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए ‘दूरदर्शी तरीके से मनमाने फैसलों’ और ‘राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण आचरण’ के साथ थोड़े समय में SIR को थोप दिया है।
  • मानसिक तनाव और आत्महत्या: उन्होंने कहा कि इस भयानक स्थिति के कारण आम नागरिकों और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के बीच मानसिक तनाव बढ़ रहा है और कई लोग खुद को खत्म करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया, “SIR के कारण न केवल आम लोग, बल्कि बीएलओ भी खुद को खत्म करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।”
  • बीएलओ को धमकी: कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बीएलओ को लगातार धमकी दी जा रही है कि उन्हें ‘भाजपा का काम करना होगा’ और ‘भाजपा के हितों को सुरक्षित रखना होगा’। नेटवर्क समस्याओं के कारण समय पर काम अपलोड न कर पाने पर उन पर दबाव और बढ़ रहा है।
  • राजस्थान का उदाहरण: उन्होंने कहा कि केवल इस राज्य में ही नहीं, बल्कि काम का दबाव न सह पाने के कारण भाजपा शासित राजस्थान में भी एक बीएलओ ने आत्महत्या कर ली, जो यह साबित करता है कि सिस्टम में गड़बड़ी है।

भाजपा को चुनौती:

कुणाल घोष ने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि जो भाजपा नेता SIR और आत्महत्या की घटनाओं पर राजनीतिक टिप्पणी कर रहे हैं और मृतकों का अपमान कर रहे हैं, अगर उनमें हिम्मत है तो वे पार्टी ऑफिस में बड़ी बातें न करके उन परिवारों के सामने जाकर आँखों में आँखें डालकर यह टिप्पणी करके दिखाएँ।

अवैध बांग्लादेशी का मुद्दा:

SIR लागू होने के बाद राज्य में रहने वाले कई बांग्लादेशियों के अपने देश लौटने के सवाल पर कुणाल घोष ने पूरी जिम्मेदारी बीएसएफ (BSF) के पाले में डाल दी। उन्होंने सवाल किया:

“यह तो बीएसएफ को देखना चाहिए। उनके निकलने के समय दिख रहा है, घुसने के समय क्यों नहीं दिखा? या फिर कुछ चीजों के बदले उन्हें इस देश में प्रवेश करने दिया जाता है? अगर यहां एक भी अवैध बांग्लादेशी है, तो उसकी जिम्मेदारी बीएसएफ की है। सीमा की निगरानी वे करते हैं।”

उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जिन लोगों से ये बातें कहलवाई जा रही हैं, वह पहले से तैयार किया गया कोई ‘नाटक’ या ‘पूर्व नियोजित’ साजिश हो सकती है।

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