तमिल भाषा के लिए ₹150 करोड़, ‘मृत भाषा’ संस्कृत को ₹2,400 करोड़? उदयनिधि स्टालिन के बयान पर देश में बवाल

चेन्नई/नई दिल्ली: तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन अपने एक और बयान के कारण फिर से राष्ट्रीय विवादों के केंद्र में आ गए हैं। शुक्रवार को चेन्नई में एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए, स्टालिन ने संस्कृत को एक “मृत भाषा” बताते हुए उसके विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवंटित ₹2,400 करोड़ पर कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही उन्होंने तमिल भाषा के लिए केवल ₹150 करोड़ आवंटित किए जाने पर सवाल उठाया।

स्टालिन के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि DMK नेता बार-बार हिंदुओं का अपमान करके “अराजकता और विभाजन” का प्रतीक बन गए हैं।

“नफरत फैलाने के लिए जाने जाते हैं” स्टालिन

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने स्टालिन के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उदयनिधि स्टालिन “हिंदुओं के प्रति नफरत के लिए जाने जाते हैं”। भाटिया ने आरोप लगाया कि DMK नेता ने पहले हिंदू धर्म और हिंदुओं की तुलना डेंगू और मलेरिया से करके उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी।

भाटिया ने स्टालिन द्वारा संस्कृत को ‘मृत भाषा’ कहने की कड़ी निंदा की और इसे “सस्ता और अनावश्यक” करार दिया। उन्होंने कहा कि स्टालिन “बार-बार” हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए “छोटे और सस्ते मजाक” करते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे “गैर-जिम्मेदाराना बयानों” के लिए DMK नेताओं को फटकार लगाई थी। बीजेपी प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा, “उदयनिधि स्टालिन यह भूल गए हैं कि संस्कृत हमारी संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ लाखों हिंदुओं की आस्था का आधार है।”

‘सनातन धर्म’ पर पुराना विवाद

बता दें कि इससे पहले, सितंबर 2023 में, उदयनिधि स्टालिन ने “सनातन धर्म” की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और इसके “उन्मूलन” का आह्वान किया था, जिससे पूरे देश में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इसके परिणामस्वरूप कई राज्यों में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं और भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें चेतावनी देते हुए कहा था कि वह “आम आदमी” नहीं हैं और उन्होंने अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

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