26/11 मुंबई हमला, 17 साल बाद भी नहीं सुलझा रहस्य! दाऊद इब्राहिम का कनेक्शन और साजिद मीर की पहचान पर बड़ा सवाल
2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले को 17 साल बीत चुके हैं, लेकिन देश के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक इस घटना के कई गहरे रहस्यों का जवाब अभी तक नहीं मिला है। इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने 160 से अधिक लोगों की जान ली थी। इस मामले की जाँच में दो सबसे महत्वपूर्ण सवाल अभी भी अनसुलझे हैं—हमले का स्थानीय कनेक्शन क्या था और मुख्य योजनाकारों में से एक साजिद मीर (Sajid Mir) की असली पहचान क्या है?
स्थानीय कनेक्शन का सवाल और दाऊद की भूमिका:
ताजमहल होटल, ओबेरॉय या छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसे जाने-माने ठिकानों के अलावा, आतंकवादियों द्वारा कम ज्ञात नरिमैन हाउस (जिसे अब चाबाद हाउस के नाम से जाना जाता है) को चुनना जाँचकर्ताओं के लिए आश्चर्यजनक था। उनका मानना था कि यह टारगेट किसी ऐसे व्यक्ति ने चुना होगा जो शहर को बहुत अच्छी तरह से जानता है। यहीं से सवाल उठता है कि क्या इस हमले में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का हाथ था, जिसका कारोबार पूरे मुंबई में फैला हुआ है।
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, इसमें कोई संदेह नहीं है कि टारगेट की पहचान करने से पहले साजिद मीर ने दाऊद और उसके लोगों से सलाह ली थी। 1993 के सीरियल बम धमाकों के टारगेट तय करने के पीछे भी दाऊद का हाथ था, इसलिए 26/11 हमले के लिए उसकी मदद लेना असामान्य नहीं था।
क्रिकेट फैन से रेकी मास्टर साजिद मीर:
दाऊद से सलाह लेने के बाद, मीर एक क्रिकेट फैन बनकर भारत आया था। इसी दौरे के दौरान उसने उन ठिकानों की पहचान की। इसके बाद, मीर ने डेविड हेडली के साथ कई बैठकें कीं और हेडली को इन सभी ठिकानों की विस्तृत रेकी करने और उनके नक्शे तैयार करने का काम सौंपा गया था।
कौन है यह साजिद मीर?
पाकिस्तान लगातार मीर के अस्तित्व से इनकार करता रहा है, यहाँ तक कि बाद में उसे एक मौलवी के रूप में दिखाने की भी कोशिश की। लेकिन भारतीय सबूतों से स्पष्ट है कि हमले के समय मीर ISI का एजेंट था। भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मीर पहले पाकिस्तानी सेना का हिस्सा था और बाद में उसे ISI में शामिल कर लिया गया। भर्ती, प्रशिक्षण, रसद और योजना सहित मुंबई हमले के हर विवरण की देखरेख उसने की थी।
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की भूमिका:
मीर ने 10 आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने के लिए मेजर इकबाल और मेजर समीर अली नामक दो अधिकारियों को नियुक्त किया था। हमले में पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट की भूमिका जानने के लिए इन तीनों ISI अधिकारियों के रहस्य को सुलझाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेवारत अधिकारियों का इस तरह के हमले में शामिल होना साबित करता है कि साजिश कितनी गहरी थी।
तहव्वुर राणा पर NIA का भरोसा:
हमले में पाकिस्तानी एस्टेब्लिशमेंट की भूमिका जानने के लिए अब बहुत कुछ तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) पर निर्भर करता है। एफबीआई के साथ प्ली बार्गेन समझौते के कारण हेडली ने कम जानकारी दी, लेकिन राणा, जिसने खुद को पाकिस्तान का पूर्व सेना अधिकारी कबूल किया है, उससे NIA को उम्मीद है कि वह इस साजिश को सुलझाने में मदद करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि मीर एक बेहद खतरनाक व्यक्ति है। उसके बारे में एक विस्तृत डॉसियर तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि पाकिस्तान उसकी सेवाओं का दोबारा उपयोग न कर सके।