मंत्री-सांसद की अनदेखी! 50 हजार खर्च कर ग्रामीणों ने खुद बनाया लकड़ी का पुल, जान जोखिम में डालकर हर दिन चुका रहे 10 रुपए

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में सदर तहसील से महज 5 किलोमीटर दूर बसे बेरी गांव के लोगों का जीवन खतरनाक रास्तों पर टिका है। गांव की ओर रुख करते ही सबसे पहले देवहा नदी और उस पर बने अस्थाई लकड़ी के पुल नजर आते हैं। गांव वालों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के लिए ये छोटे और जोखिम भरे पुल खुद बनाए हैं।

केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री की लापरवाही

बेरी गांव से एसडीएम और सदर तहसील की दूरी केवल 5 किलोमीटर है, इसके बावजूद जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

  • यहां के सांसद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री हैं।
  • सदर विधायक संजय सिंह गंगवार प्रदेश सरकार में गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री हैं। संजय सिंह गंगवार के पिछले 8 साल से विधायक होने के बावजूद आम लोगों की दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं।

50 हजार का खर्च, 10 रुपए टोल

नदी पर अस्थाई पुल बनाने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने आम जनता की सुविधा के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर तीन लकड़ी के पुल बनाए हैं। एक पुल बनाने में लगभग 50 हजार रुपए का खर्च आया।

लोग अपनी सुविधा अनुसार इस पुल पर 10 रुपए का भुगतान करते हैं। यहां सुबह 5 बजे से लेकर रात 7 से 8 बजे तक लगातार आवागमन रहता है। जिनके पास पैसा नहीं होता, उनके लिए स्कैनर की व्यवस्था भी की गई है। इस अस्थाई मार्ग का उपयोग बरेली और उत्तराखंड जाने वाले लोग भी करते हैं।

दुर्घटना का खतरा बरकरार

यह पुल बेशक लोगों को सहूलियत देता है, लेकिन इस पर दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। गांव वाले अपने जोखिम पर इन पुलों का उपयोग करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेता और प्रशासनिक लोग यहां से गुजरते हैं, लेकिन वर्षों से दर्जनों गांव के लोगों की इस कठिनाई पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। ग्रामीणों की लगातार मांग है कि सरकार इस स्थान पर एक स्थायी पुल का निर्माण कराए।

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