AIIMS का ऐतिहासिक प्रोटोकॉल, अज्ञात शवों की पहचान के लिए 14 घंटे में होगा शरीर का पुनर्निर्माण, बनेगा ‘नेशनल मुर्दाघर’
हाल के वर्षों में, ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां बिना वजह मारे गए व्यक्तियों के शवों की पहचान करना संभव नहीं हो पाता है। इस समस्या से निपटने के लिए नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने इन शवों के सर्वोत्तम पुनर्निर्माण (Reconstruction) और उन्हें उनके परिवारों को सौंपने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार किया है। साथ ही, एक राष्ट्रीय मुर्दाघर (National Mortuary) स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
एम्स में फोरेंसिक साइंस के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने टीवी9 भारतवर्ष को दिए एक विशेष साक्षात्कार में इस प्रोटोकॉल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक तकनीकी योजना तैयार की गई है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति का शव सर्वोत्तम स्थिति में उसके परिवार को सौंपा जाए।
बॉडी रिकंस्ट्रक्शन में लगेंगे 14 घंटे
डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि अक्सर दुर्घटनाओं में लोगों के शरीर विकृत हो जाते हैं। ऐसी स्थितियों में, परिवार के सदस्यों के लिए पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, एम्स ने शवों का पुनर्निर्माण (Body Reconstruction) शुरू किया है, जिससे सही पहचान संभव हो सके।
- सर्जरी प्रक्रिया: यदि किसी व्यक्ति का चेहरा बम विस्फोट में क्षतिग्रस्त हो गया हो, तो उसे उसके मूल आकार में वापस लाने के लिए विभिन्न प्रकार की सर्जरी की जाती हैं, जिनमें चेहरे की सर्जरी सबसे महत्वपूर्ण है। एक विशेष तकनीक का उपयोग करके चेहरे के उड़े हुए हिस्से को फिर से बनाया जाता है।
- समय: शरीर को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 14 घंटे का समय लगता है।
शवों का संरक्षण और डीएनए मैचिंग की चुनौती
डॉ. गुप्ता ने शवों को लंबे समय तक संरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए विभिन्न तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं।
विस्फोटों के मामलों में अक्सर देखा जाता है कि मानव शरीर के विभिन्न अंग आपस में मिल जाते हैं। उन्हें सही ढंग से अलग करना और पुनर्निर्मित करना एक महत्वपूर्ण कार्य है जिसके लिए कुशल तकनीक की आवश्यकता होती है। डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि कई बार शरीर के एक हिस्से की डीएनए मैचिंग एक अस्पताल में की जाती है, जबकि दूसरा हिस्सा दूसरे अस्पताल भेजा जाता है। इस समस्या से बचने के लिए, सभी शारीरिक अंगों को एक ही अस्पताल में लाना और मैचिंग करना आवश्यक है।
नेशनल श्मशान/मुर्दाघर बनाने पर विचार
डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि विस्फोटों, विमान दुर्घटनाओं और ट्रेन दुर्घटनाओं जैसे मामलों में जहां एक साथ कई लोग मारे जाते हैं, शवों के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय मुर्दाघर बनाने पर विचार किया जा रहा है, जहाँ एक साथ 400 से 500 शवों को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर ऑस्ट्रेलिया ही एकमात्र ऐसा देश है जहां इस तरह का मुर्दाघर है।