तेजस के लिए ४०० ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलों का ऑर्डर! IAF की हमला क्षमता Mach 3 की गति से बढ़ेगी

भारतीय वायु सेना (IAF) अपनी वायु-जनित हमला क्षमताओं को बढ़ाने के लिए तैयार है। IAF अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क-१ए को उन्नत ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) मिसाइलों से लैस करने जा रही है, जिसके लिए लगभग ₹८,००० करोड़ रुपये मूल्य की ४०० मिसाइलों का ऑर्डर दिया गया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने इस बड़े ऑर्डर की पुष्टि की है।

तेजस के लिए गेमचेंजर हथियार:

ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल को भारत के तीन प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ा जा सकता है, लेकिन यह विशेष रूप से तेजस एमके१ए के लिए एक ब्रह्मास्त्र साबित होगा।

  • क्षमता: तेजस एमके१ए अपने पंखों पर दो ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा।
  • अन्य प्लेटफॉर्म: इन मिसाइलों को राफेल और एसयू-३०एमकेआई लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस-एनजी की मुख्य विशेषताएं:

ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जनरेशन) वर्तमान ब्रह्मोस मिसाइल का नवीनतम और सबसे उन्नत संस्करण है। इसकी प्रमुख तकनीकी विशेषताएं इसे अत्यधिक प्रभावी बनाती हैं:

  • गति: यह दुश्मन पर माच-३ (Mach 3) की सुपरसोनिक गति से हमला करेगी।
  • तकनीक: यह हल्की, कम अवलोकन योग्य (Low Observable) और तेजी से तैनात की जा सकती है।
  • उपयोगिता: इसका छोटा आकार, कम वजन और कम रडार हस्ताक्षर (Low Radar Signature) इसे तेजी से संचालन और दुश्मन के क्षेत्रों में गहरे-घुसपैठ (Deep-Penetration) मिशन के लिए अत्यंत उपयोगी बनाता है।

समयरेखा और स्वदेशी उत्पादन:

IAF द्वारा ४०० मिसाइलों के ऑर्डर की प्रतिबद्धता के बाद, उत्पादन और आपूर्ति की समयसीमा इस प्रकार है:

  • परीक्षण: मिसाइल का परीक्षण २०२६ में शुरू होगा।
  • उत्पादन: उत्पादन मंजूरी मिलने में लगभग दो साल लगेंगे, जिसके बाद व्यापक उत्पादन शुरू करने में २-३ साल लग सकते हैं।
  • सामरिक महत्व: अगले ५-६ वर्षों के भीतर ब्रह्मोस-एनजी का आगमन वायु सेना की आक्रामक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।
  • उत्पादन लक्ष्य: उत्तर प्रदेश में स्थापित नया ब्रह्मोस संयंत्र प्रति वर्ष १०० मिसाइलों का उत्पादन करने की क्षमता रखेगा, जिससे भारत अपनी घरेलू और बढ़ती निर्यात मांग दोनों को पूरा कर सकेगा।

भारतीय वायु सेना का यह महत्वपूर्ण आदेश स्वदेशी मिसाइल प्रौद्योगिकी पर देश के दीर्घकालिक भरोसे को दर्शाता है।

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