32 हजार शिक्षकों की नौकरी बहाल! कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी ने जताई खुशी, खारिज हुआ सिंगल बेंच का फैसला
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी बहाल रखने का निर्देश दिया है। बुधवार को आए इस ऐतिहासिक फैसले में, जस्टिस तपोव्रत चक्रवर्ती की डिवीजन बेंच ने साफ कर दिया कि जो लोग 9 साल से नौकरी कर रहे हैं, अगर इस समय उनकी नौकरी रद्द की जाती है तो समाज पर ‘विपरीत प्रतिक्रिया’ पड़ सकती है। इस फैसले पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने खुशी जाहिर की है।
फैसला आने के बाद ममता बनर्जी ने कहा, “मैं न्याय का सम्मान करती हूँ। मैं हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करती हूँ। मुझे खुशी है कि मैं अपने भाई-बहनों की नौकरी सुरक्षित कर पाई।”
शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने तत्काल अपने ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट कर प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को बधाई दी। उन्होंने लिखा, “आज माननीय हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के आलोक में प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को बधाई। हाईकोर्ट के सिंगल बेंच का फैसला रद्द हो गया है। 32,000 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी पूरी तरह से सुरक्षित है।” वहीं, वकील कल्याण बनर्जी ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया।
सिंगल बेंच का फैसला खारिज होने के 3 मुख्य तर्क
तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने अपने सिंगल बेंच के फैसले में पूरे इंटरव्यू प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नौकरी रद्द करने का निर्देश दिया था। लेकिन डिवीजन बेंच ने उस फैसले को खारिज करते हुए तीन मुख्य तर्क दिए:
- ‘रोमिंग इन्क्वायरी’ नहीं: जस्टिस तपोव्रत चक्रवर्ती ने टिप्पणी की कि अदालत किसी भी ‘रोमिंग इन्क्वायरी’ (जाँच एजेंसी की तरह विस्तृत छानबीन) को अंजाम नहीं दे सकती।
- शिक्षण की गुणवत्ता: अदालत ने कहा कि जो लोग इतने समय से पढ़ा रहे थे, उनकी पढ़ाने की शैली पर कोई सवाल नहीं उठा है। यानी शिक्षकों की योग्यता पर सवाल नहीं उठा है।
- अंक देने में प्रमाण का अभाव: इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान परीक्षक ने पैसे लेकर अतिरिक्त अंक दिए, इसका कोई विशिष्ट प्रमाण नहीं है। जिसके कारण यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया में ही गलती हुई थी।
इन्हीं तर्कों के आधार पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को रद्द करते हुए 32 हजार शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।