‘आत्मनिर्भर भारत’ को बड़ी सफलता, Tejas Mark 2 के लिए DRDO ने बनाई स्वदेशी इजेक्शन सीट, 800 KM/H पर हुआ सफल परीक्षण
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को एक बड़ी सफलता दी है। DRDO ने अगली पीढ़ी के Tejas लड़ाकू विमान के उन्नत संस्करण, Tejas Mark 2, के लिए स्वदेशी इजेक्शन सीट सिस्टम सफलतापूर्वक विकसित और टेस्ट कर लिया है। यह इजेक्शन सीट आपातकाल में पायलट को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करती है।
800 किमी/घंटा की रफ्तार पर रॉकेट स्लेड टेस्ट
DRDO ने लड़ाकू जेट के लिए बनाए गए इस इजेक्शन सीट सिस्टम का हाई स्पीड रॉकेट स्लेड टेस्ट (HSRST) सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में अत्याधुनिक रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा का उपयोग करके किया गया। सिस्टम को वहाँ लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटा की गति पर परखा गया।
इस टेस्ट में तीन महत्वपूर्ण पहलुओं का सत्यापन किया गया:
- कैनोपी सेवेरेंस: यह सुनिश्चित किया गया कि पायलट के सिर के ऊपर का कांच का ढक्कन (कैनोपी) सही ढंग से टूटकर जेट से अलग हो जाए।
- इजेक्शन सीक्वेंस: सीट के तुरंत बाहर निकलने की प्रक्रिया समय पर पूरी हुई।
- एयरक्रू रिकवरी: सीट निकलने के बाद पायलट को सुरक्षित बचाने की पूरी व्यवस्था सही से काम करे।
इंजन को छोड़कर सब भारत में निर्मित होगा
इस इजेक्शन सीट की सफलता के साथ, Tejas Mark 2 के स्वदेशी घटकों की सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम जुड़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अगली पीढ़ी के Tejas Mark 2 लड़ाकू विमान में इंजन को छोड़कर लगभग सभी महत्वपूर्ण कंपोनेंट भारत में ही बनाए जाएंगे।
Tejas Mark 2 में शामिल स्वदेशी कंपोनेंट: रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स वारफेयर सूट, रडार वार्निंग रिसीवर, मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम, कॉकपिट का ढक्कन (कैनोपी), एयर फ्रेम, नेविक नेविगेशन सिस्टम, फ्लाई बाय वायर कंट्रोल सिस्टम, विभिन्न कंपोजिट सामग्री, ऑन बोर्ड ऑक्सीजन जनरेटिंग सिस्टम, डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर, हेड अप डिस्प्ले, लैंडिंग गियर्स और अब इजेक्शन सीट भी।