BLO के बढ़ते काम के बोझ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यों को SIR ड्यूटी के लिए अतिरिक्त स्टाफ लगाने का निर्देश
नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में तेजी आने के कारण बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बढ़ते काम के दबाव और कई अधिकारियों की आत्महत्या की खबरों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकारों को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। कोर्ट ने साफ़ किया कि सरकारी कर्मचारी SIR का वैधानिक दायित्व निभाने के लिए बाध्य हैं, लेकिन उन पर अमानवीय दबाव नहीं डाला जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के राज्यों को निर्देश: मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने BLO के काम का बोझ कम करने के लिए तीन स्पष्ट निर्देश दिए:
१. अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती और काम के घंटे कम करना: SIR प्रक्रिया में लगे BLO के काम का दबाव और काम के घंटे कम करने के लिए राज्यों को तुरंत अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए। २. व्यक्तिगत छूट पर विचार: अगर कोई BLO स्वास्थ्य या व्यक्तिगत गंभीर कारणों से ड्यूटी से छूट का अनुरोध करता है, तो उनके आवेदनों पर मानवीय आधार पर केस-बाय-केस विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, ऐसे मामलों में काम प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत प्रतिस्थापन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ३. सीधे कोर्ट आने की अनुमति: कोर्ट ने कहा कि BLO के खिलाफ दर्ज FIR और जेल की धमकी के मुद्दे उठाए गए हैं। यदि किसी अन्य प्रकार की राहत नहीं दी जाती है, तो संबंधित व्यक्ति अपनी चिंताओं को लेकर सीधे अदालत का रुख कर सकता है।
अदालत का स्पष्टीकरण: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार या राज्य चुनाव आयोग द्वारा ECI के तहत SIR सहित वैधानिक कर्तव्यों (Statutory Duties) का पालन करने के लिए नियुक्त कर्मचारी इन कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, यदि BLO को किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो उसका समाधान अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती से किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि BLO के खिलाफ दर्ज FIR और कारावास की धमकी के मामलों की भी जांच की जानी चाहिए।