धान कटाई के मौसम में नया आतंक! पराली जलाने से जलकर राख हो रही बीघा-की-बीघा फसलें, पश्चिम मेदिनीपुर में आग लगने से मचा हड़कंप!

धान कटाई का मौसम ज़ोरों पर है और हर तरफ़ मशीनों से धान काटा जा रहा है। हालाँकि, कुछ किसान धान उठाने के बाद खेतों में बचे हुए डंठल—जिसे कृषि विज्ञान की भाषा में ‘पराली’ (नाड़ा) कहा जाता है—को जलाने लगे हैं। नतीजतन, न केवल उस खेत की पराली जल रही है, बल्कि सर्दियों की उत्तरी हवाओं के कारण आग पड़ोसी खेतों में भी तेज़ी से फैल रही है। इस आग में खेतों में खड़ी सुनहरी, पकी हुई धान की फसलें भी जलकर राख हो रही हैं।

इस सप्ताह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कई इलाकों से पराली जलाने की खबरें सामने आई हैं। गुरुवार सुबह जिले के खाकुर्दा इलाके में स्थानीय किसानों ने एक खेत में तेज़ी से आग जलती देखी।

पुलिस और स्थानीय लोगों की मुस्तैदी:

आग लगने की खबर मिलते ही किसानों ने तुरंत पुलिस के टोल फ्री नंबर पर फोन कर सूचना दी। बेलदा थाने की पुलिस और जोड़ागेरिया चौकी की पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुँची। इस बीच, स्थानीय लोग और पड़ोसी खेतों में धान निकालने में व्यस्त किसानों ने दौड़कर पेड़ों की डालियाँ तोड़कर आग बुझाने की कोशिश की। पुलिस और किसानों के संयुक्त प्रयास से आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका।

हालांकि, तब तक पकी हुई धान की फसल सहित कई बीघा क्षेत्र की पराली जलकर राख हो चुकी थी। बुधवार को दाँतन 2 ब्लॉक के बागगेड़िया इलाके में पराली जलाने के कारण कई बीघा फसल जलने के बाद खाकुर्दा इलाके में फिर से यही घटना हुई।

प्रशासनिक प्रतिबंधों और पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित नियमों के बावजूद ऐसी घटनाओं पर सभी हैरान हैं। पुलिस ने यह पता लगाने के लिए जाँच शुरू कर दी है कि किसने आग लगाई।

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