सास की बीमारी, विशेष क्षमता वाला बेटा, 34 की उम्र में मीराबाई चानू से प्रेरित होकर वेटलिफ्टिंग में आई त्रिपुरा की गृहिणी

गपशप और टीवी सीरियल देखना उन्हें बिल्कुल नापसंद है। अपने घरेलू जीवन से हटकर कुछ करने की तलाश में, त्रिपुरा की 34 वर्षीय अपूर्वा सरकार ने वेटलिफ्टिंग को अपना नया रास्ता चुना। पूर्वी क्षेत्रीय लीग में उन्हें इस बार ‘वुमेन ऑफ सब्सटेंस’ के तौर पर पहचाना गया।

मार्शल आर्ट्स क्लास से वेटलिफ्टिंग का सफर:

दो बेटों की मां अपूर्वा की खेल में आने की कहानी काफी दिलचस्प है। 2022 में, अपने छोटे बेटे को मार्शल आर्ट्स क्लास ले जाते समय अचानक उनके मन में कुछ करने की इच्छा जागी और उन्होंने वेटलिफ्टिंग का शौक पाला। पति श्यामल सरकार पहले तो उनकी बात सुनकर हंसे, लेकिन उन्होंने पत्नी को पूरा समर्थन दिया और तुरंत ही ट्रेनिंग में दाखिला करवा दिया।

ओलंपियन वेटलिफ्टर मीराबाई चानू उनकी प्रेरणा बनीं। अपूर्वा कहती हैं, “ओलंपिक में मीराबाई चानू को देखकर मेरा नजरिया बदल गया था। अगर 48 किलो की मीराबाई चानू इतना वजन उठा सकती हैं, तो मैं 60 किलो की होकर क्यों नहीं कर सकती?”

चुनौतियों के बावजूद अटूट हौसला:

बीमार सास, विशेष क्षमता वाला बड़ा बेटा, और काम के सिलसिले में पति का बाहर रहना—इन हज़ारों पारिवारिक चुनौतियों को संभालते हुए भी अपूर्वा वेटलिफ्टिंग के प्रति अपने प्यार के दम पर असाध्य को साध रही हैं।

हाल ही में वह खेलो इंडिया अस्मिता वेटलिफ्टिंग ईस्टर्न लीग में महिलाओं के 63 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने कोलकाता आई थीं। खुदीराम प्रैक्टिस सेंटर में वह मामूली अंतर से पदक से चूक गईं, लेकिन उनके पति श्यामल सरकार ने कहा कि उनकी पत्नी ही उनके लिए असली पदक हैं।

पदक जीतने का दृढ़ संकल्प:

अपूर्वा ने इससे पहले नॉर्थ-ईस्ट ओलंपिक गेम्स में भी भाग लिया था, जहां वह पांचवें स्थान पर रही थीं। इतना दबाव होने के बावजूद, वह खेल छोड़ना नहीं चाहतीं। उनका प्राथमिक लक्ष्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है, और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना है।

अपूर्वा ने दृढ़ता से कहा, “मैं कई मुश्किलों के कारण अभ्यास नहीं कर पाई थी। मैं केवल एक महीने के अभ्यास के साथ यहां आई। वरना मैं निश्चित रूप से पदक जीतती। अब वापस जाकर कड़ी ट्रेनिंग शुरू करूंगी।” जिमनास्ट दीपा कर्मकार के पिता दुलाल डे (त्रिपुरा वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के प्रमुख) सहित परिवार के सदस्यों के समर्थन से अपूर्वा अपनी उम्र को महज़ एक संख्या मानकर सफलता की ओर उड़ान भरना चाहती हैं।

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