नबद्वीप के बाद अब बारासात! स्टेशन परिसर के कूड़े के ढेर से मिले भारी मात्रा में आधार-वोटर कार्ड, क्या SIR के डर से फेंका गया?

बारासात: नबद्वीप के बाद अब बारासात। शाम के समय बारासात स्टेशन परिसर में कूड़े के ढेर से भारी संख्या में आधार कार्ड, वोटर कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तिगत दस्तावेज बरामद होने से इलाके में सनसनी फैल गई है। SIR (राज्य नागरिक रजिस्टर) के माहौल के बीच हुई इस घटना ने इसके पीछे के उद्देश्य को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। सूचना मिलने पर रेल पुलिस (GRP) ने दस्तावेजों को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

कूड़े के ढेर में क्या-क्या मिला?

रेल पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार शाम को बारासात स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर पांच के पास रेलवे लाइन के किनारे नाले और कूड़ेदान के पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड और पैन कार्ड समेत कुछ एटीएम कार्ड बिखरे हुए पाए गए। ये बड़ी संख्या में दस्तावेज वहां कैसे पहुंचे, इस पर जांचकर्ताओं को संदेह है। बरामद दस्तावेज असली हैं या नकली, इसकी जांच की जा रही है।

बारासात जीआरपी के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने कहा, “यह जांच की जा रही है कि आधार, वोटर कार्ड सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज यहां कैसे आए। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ये पहचान पत्र स्थानीय लोगों के हैं या किसी बाहरी व्यक्ति के। घटना के पीछे के मकसद की जांच शुरू कर दी गई है।”

SIR के डर से दस्तावेज फेंकने का संदेह:

गुरुवार शाम को व्यस्त स्टेशन परिसर में स्थानीय लोगों ने इस घटना को देखा। एक चश्मदीद सुदीप दास ने कहा, “देखकर लग रहा है कि ये सभी नकली हैं। अगर असली होते तो कोई इन्हें इस तरह नहीं फेंकता। SIR के डर से ही किसी ने इन्हें फेंक दिया है। अवैध लोगों को देश से बाहर निकालने के लिए SIR लागू करना जरूरी है।”

चश्मदीदों को इस संदेह का कारण यह है कि राज्य में SIR के तहत जनगणना फॉर्मों के डिजिटलीकरण का काम जोर-शोर से चल रहा है, जिसके बीच इस तरह की अवांछित घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में नबद्वीप के प्रताप नगर में सड़क किनारे नाले से भी बड़ी संख्या में नकली वोटर कार्ड बरामद हुए थे।

राजनीतिक खींचतान शुरू:

इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा नेता प्रतीप चटर्जी ने इस घटना को राज्य की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमें संदेह है कि इसके पीछे कोई अवैध गिरोह हो सकता है। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को बसाने के लिए अवैध रूप से आधार और वोटर कार्ड बनाए जा रहे हैं, और इसमें सत्तारूढ़ दल की मिलीभगत है।”

जवाब में स्थानीय टीएमसी पार्षद देबब्रत पॉल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हर चीज में राजनीति ढूंढना भाजपा की आदत है। इसके पीछे का मकसद क्या है, यह रेलवे पुलिस जांच कर सुनिश्चित करेगी। जांच पूरी होने से पहले इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं है।”

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