अमेरिकी दबाव खारिज! मोदी-पुतिन की मुलाकात में किन मुद्दों पर ‘एकजुट’ हुए भारत-रूस? राजघाट से हैदराबाद हाउस तक की रणनीति
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दूसरे दिन, शुक्रवार (५ दिसंबर) की सुबह राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इन औपचारिकताओं के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने हैदराबाद हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक की।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं हमेशा कहता रहा हूँ कि भारत तटस्थ नहीं है। हम शांति के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि दुनिया जल्द ही अपनी चिंताओं से मुक्त होगी और घोषणा की कि वे दिनभर विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे।
‘विश्वास एक बड़ी शक्ति है’, शांति ही मूल लक्ष्य
रूस-भारत संबंधों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विश्वास’ को एक बड़ी शक्ति बताया। उनका मानना है कि विश्व का कल्याण शांति के मार्ग में निहित है। मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत शांति का समर्थन करता है और कहा कि दुनिया फिर से शांति की ओर लौटेगी। इस दौरे के माध्यम से भारत ने एक बार फिर दुनिया को शांति का संदेश दिया, साथ ही यह भी दिखाया कि वह अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा।
पूतनि ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान को दोहराया और निमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने मोदी के विचारों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास जारी हैं और रूस भी शांति का समर्थन करता है। पुतिन ने आगे कहा कि वह शांति के लिए हर प्रयास के साथ हैं। उन्होंने भारत के रुख की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देश शांति की तलाश में एकजुट हैं, जो विश्व शांति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
दोनों देशों की रणनीतिक आवश्यकता
यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का भारत दौरा भारत-रूस संबंधों के लिए एक गहरी परीक्षा है। भारत रक्षा समझौतों, सस्ते तेल और प्रौद्योगिकी के लिए रूस पर निर्भर करता है, लेकिन वह अमेरिका को भी नाराज़ नहीं करना चाहता। इस बीच, पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस को भारत जैसे विश्वसनीय और स्थिर बाज़ार की सख्त ज़रूरत है।