मनरेगा का नाम बदला, अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी’, काम के दिन और मज़दूरी दोनों बढ़े
केंद्र सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) योजना को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, इस लोकप्रिय योजना का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी’ रखा गया है।
इसके साथ ही, योजना के तहत न्यूनतम काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यानी, अब इस योजना के तहत साल भर में कम से कम 125 दिनों का काम दिया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम दैनिक मज़दूरी भी बढ़ाकर ₹240 प्रति दिन कर दी गई है।
नाम बदलने का अचानक कारण क्या?
हाल के दिनों में प्रशासनिक स्तर पर नाम बदलने की जो प्रवृत्ति देखी जा रही है, यह उसी का एक उदाहरण है। औपनिवेशिक मानसिकता को ‘दूर फेंकने’ के उद्देश्य से राजभवन लोकभवन बन गया, राज्यपाल लोकपाल हो गए। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया है। इसी तरह राजपथ कर्तव्यपथ और रेस कोर्स रोड लोक कल्याण मार्ग बन गया है। अब उसी कड़ी में मनरेगा परियोजना का नाम भी बदल दिया गया है।
क्या है बंगाल की राजनीति का कनेक्शन?
जानकार मानते हैं कि इस नाम परिवर्तन के पीछे बंगाल की राजनीति का हाथ हो सकता है। मनरेगा को लेकर बंगाल और केंद्र के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। बकाए का भुगतान करने से लेकर 100 दिनों के काम को फिर से शुरू करने के निर्देशों तक— कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक, हर स्तर पर केंद्र सरकार इस योजना को लेकर ‘बैकफुट’ पर रही है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। एक वर्ग का मानना है कि मनरेगा दिन-ब-दिन केंद्र के लिए एक ‘धब्बा’ बनता जा रहा था। ऐसा माना जा रहा है कि उस ‘धब्बे’ को हटाने और परियोजना की छवि बदलने के लिए केंद्र ने नाम बदलने का यह फैसला लिया है।