पासपोर्ट की होगी ‘चिरफाड़’! 30 लाख वोटरों के दस्तावेजों की जांच शुरू, संदेह होने पर होगी कड़ी सुनवाई

पश्चिम बंगाल में प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद 30 लाख मतदाताओं का भविष्य अधर में लटक गया है। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इन वोटरों का नाम 2002 की मतदाता सूची से लिंक (मैपिंग) नहीं हो पाया है। अब इन लोगों को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई एक अनिवार्य रूप से जमा करना होगा।

आयोग के सूत्रों के मुताबिक, 30 लाख में से 20 लाख वोटरों ने अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या पासपोर्ट की प्रतियों की है। ईआरओ (ERO) अब इन पासपोर्ट्स की प्रमाणिकता जांचने के लिए संबंधित थानों और इमिग्रेशन विभाग की मदद ले रहे हैं। यदि दस्तावेजों में कोई ‘लॉजिकल विसंगति’ पाई जाती है, तो इन वोटरों को व्यक्तिगत सुनवाई (Hearing) के लिए बुलाया जाएगा।

संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं के तहत यह जांच की जा रही है। 20 लाख वोटरों का डेटा पहले ही बीएलओ (BLO) को वेरिफिकेशन के लिए भेज दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल वैध दस्तावेज वाले नागरिकों का नाम ही अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।

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