“हिंदुओं को गंगा में फेंकने की भाषा मुझे मंजूर नहीं”, हुमायूं कबीर के खिलाफ बरसीं निशा चटर्जी

बालीगंज सीट से उम्मीदवारी रद्द होने के बाद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशा चटर्जी ने जन विकास पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। निशा ने हुमायूं पर सांप्रदायिक राजनीति करने और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच दरार पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप निशा ने कहा, “मुझसे कहा गया था कि यह पार्टी धर्मनिरपेक्ष है, लेकिन अब इसके प्रमुख खुद कह रहे हैं कि वे हिंदुओं का समर्थन नहीं करते। ‘हिंदुओं को काटकर गंगा में फेंक देने’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैं एक हिंदू हूं और ऐसी नफरती सोच का हिस्सा कभी नहीं बन सकती।” निशा का मानना है कि उन्हें उम्मीदवार बनाना और फिर हटाना, केवल सुर्खियां बटोरने का एक तरीका था।
विभाजन की राजनीति निशा ने हुमायूं कबीर को घेरते हुए कहा कि वे बाबरी मस्जिद जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर भावनाओं के साथ खेल रहे हैं। हुमायूं द्वारा उनकी ‘ड्रिंक्स’ वाली फोटो पर उठाए गए सवालों पर निशा ने कहा कि यह सब उन्हें बदनाम करने और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश है। निशा ने स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों का सम्मान करती हैं और राजनीति में इस तरह का भेदभाव उन्हें बर्दाश्त नहीं है।