दस्तावेज सत्यापन में नहीं चलेगा २०१० के बाद का OBC कार्ड, चुनाव आयोग ने जिलाधिकारियों को भेजा निर्देश

पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन सुधार यानी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि २०१० के बाद जारी किए गए ओबीसी (OBC) प्रमाणपत्रों का उपयोग एसआईआर प्रक्रिया में दस्तावेज के रूप में नहीं किया जा सकेगा। चुनाव आयोग ने उन सभी ओबीसी प्रमाणपत्रों की मान्यता रद्द कर दी है जिन्हें हाईकोर्ट ने अवैध घोषित किया था।

यह मामला तब गरमाया जब कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई थी कि रद्द किए गए प्रमाणपत्रों का उपयोग सरकारी सत्यापन में न हो। जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने चुनाव आयोग को ७ दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेने का आदेश दिया था। आयोग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि केवल २०१० से पहले जारी किए गए प्रमाणपत्र ही वैध माने जाएंगे। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और जिला चुनाव अधिकारियों को दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।

आयोग के अनुसार, पिछले साल १२ जून को राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई ओबीसी सूची को भी मान्य रखा गया है। हालांकि, २०१० से २०२४ के बीच जारी किए गए लाखों प्रमाणपत्रों पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दस्तावेज सत्यापन के लिए आयोग द्वारा निर्धारित १३ पहचान पत्रों की सूची में अब रद्द किए गए ओबीसी कार्ड शामिल नहीं होंगे। इस फैसले से राज्य की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा होने की संभावना है।

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