रिटायर्ड प्रोफेसरों को बड़ा झटका! ७५% ग्रेच्युटी और पेंशन में बदलाव, सड़कों पर उतरेंगे शिक्षक!

पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पेंशन और ग्रेच्युटी के नियमों में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है, जिससे हजारों रिटायर्ड कर्मियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने वाली है।
नए नियमों का कड़ा प्रहार: मिली जानकारी के अनुसार, अब सेवानिवृत्त कर्मियों को मिलने वाली पूरी पेंशन स्थायी नहीं होगी, बल्कि उसे प्रोविजनल (अस्थायी) माना जाएगा। सबसे चौंकाने वाला बदलाव ग्रेच्युटी में हुआ है। नए आदेश के मुताबिक, अब रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी की पूरी राशि नहीं मिलेगी। पहले चरण में कुछ शर्तों के साथ केवल ७५ प्रतिशत ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा। साथ ही, पेंशन के एकमुश्त हिस्से (Commutation) के भुगतान पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
यह नियम उन सभी पर लागू होगा जो १ अक्टूबर २०२५ या उसके बाद रिटायर हुए हैं और जो जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) योजना के अंतर्गत आते हैं।
विश्वविद्यालयों में भारी आक्रोश: जादवपुर, कलकत्ता, बर्दवान और रवींद्र भारती सहित राज्य के १८ विश्वविद्यालयों के शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव पार्थ प्रतिम राय ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हक छीनने की कोशिश कर रही है। कलकत्ता विश्वविद्यालय के शांख्यायन चौधरी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो वे संगठित आंदोलन करेंगे।
प्रशासनिक संकट: शिक्षकों का यह भी कहना है कि राज्य के ११ विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं होने के कारण प्रशासनिक कार्य ठप पड़े हैं। बर्दवान विश्वविद्यालय के भास्कर गोस्वामी ने कहा कि बिना स्थायी कुलपति के शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। पेंशन और ग्रेच्युटी में कटौती ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।