इंदिरा गांधी का दौर या मोदी का ‘न्यू इंडिया’? जुग्गी भसीन के थ्रिलर में छिपे हैं भारत के परमाणु राज

सत्तर के दशक की राजनीति, जासूसी की दुनिया और सत्ता के गलियारों में होने वाली साजिशों को समेटे हुए जुग्गी भसीन का नया उपन्यास ‘Lies, Spies and Nuclear Rise’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अनुभवी पत्रकार जुग्गी भसीन ने अपनी दशकों की पत्रकारिता का निचोड़ इस किताब में पिरोया है, जो १९७४ के परमाणु परीक्षण के इर्द-गिर्द घूमती है।

उपन्यास की मुख्य पात्र ‘प्रिया कौल’ स्पष्ट रूप से इंदिरा गांधी से प्रेरित हैं। किताब में दिखाया गया है कि कैसे एक तरफ देश में छात्र आंदोलन और विपक्ष का दबाव था, तो दूसरी तरफ उनका अपना बेटा ही उनके खिलाफ ‘भीतरी दुश्मन’ बन गया था। ऐसे में अपने राजनीतिक अस्तित्व और देश की संप्रभुता को बचाने के लिए प्रिया कौल ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने का साहसिक फैसला लिया।

लेखिका लिपिका भूषण के अनुसार, यह किताब केवल इतिहास नहीं बताती, बल्कि वर्तमान भारत की झलक भी दिखाती है। जिस तरह इंदिरा गांधी ने तत्कालीन महाशक्तियों के दबाव के बीच अपनी राह चुनी, वैसा ही कुछ आज के भारत में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भी देखने को मिलता है। जासूसी, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह थ्रिलर एक मास्टरपीस है।

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