बंगाल में निपाह की दहशत: N-95 मास्क और फलों की सफाई ही है बचाव, डॉक्टरों ने जारी की गाइडलाइन

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का बढ़ता खतरा लोगों की नींद उड़ा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस इतना खतरनाक है कि इसकी कोई दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ७५% तक की मृत्यु दर वाला यह संक्रमण किसी को भी मौत की नींद सुला सकता है।

संक्रमण के स्रोत: चमगादड़ इस वायरस के मुख्य वाहक हैं। उनकी लार या मल से दूषित फल और कच्चे खजूर का रस पीने से इंसान संक्रमित होते हैं। इसके अलावा सूअर, कुत्ता और बिल्ली जैसे जानवरों के शारीरिक तरल पदार्थ (Fluids) के संपर्क में आने से भी यह फैलता है।

बचाव के उपाय: विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से बचना चाहिए। सूअर के मांस का सेवन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। फलों को हमेशा धोकर खाएं और बाहर के खुले खाने से परहेज करें। संक्रमण वाले क्षेत्रों में N-95 मास्क का उपयोग अनिवार्य है।

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