चीन की बढ़ेगी बेचैनी! यूरोपीय संघ के दिग्गज दिल्ली में, क्या होने जा रही है सदी की सबसे बड़ी ट्रेड डील?

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच द्विपक्षीय संबंध आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं, जहां से वैश्विक राजनीति की नई दिशा तय होगी। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया टैरिफ और ट्रेड वॉर की चुनौतियों से जूझ रही है, यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं का भारत दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, यह दौरा बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की ओर एक बड़ा कदम हो सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी के २० साल पूरे हो चुके हैं। आज ईयू भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। अनुमान है कि वित्त वर्ष २०२४-२५ में द्विपक्षीय व्यापार १३६ अरब डॉलर के आंकड़े को छू लेगा। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। ६जी (6G) तकनीक से लेकर सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक, दोनों पक्ष भविष्य की चुनौतियों के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों की बढ़ती नजदीकी चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए बड़ी चुनौती है। हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास इसकी गवाही देते हैं। वहीं अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो (ISRO) और ईएसए (ESA) का तालमेल चंद्रयान-३ और आदित्य-L1 जैसे मिशनों में स्पष्ट दिखा है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसे प्रोजेक्ट्स वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार को तोड़ने का दम रखते हैं। ईयू नेताओं का यह दौरा न केवल व्यापारिक बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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