योगी सरकार vs स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: अब शंकराचार्य से मांगा ‘कागज’, यूपी में धर्म और सत्ता की सीधी जंग!

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच ठन गई है। प्रयागराज माघ मेले में शाही स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी पर सवाल उठाने तक पहुंच गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे खुद को ‘शंकराचार्य’ क्यों लिख रहे हैं, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस नोटिस ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है।
परंपरा पर पहरा? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि शंकराचार्य का फैसला गुरु-शिष्य परंपरा और अन्य पीठों के शंकराचार्य करते हैं, न कि कोई मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति। पिछले ४८ घंटों से वे फुटपाथ पर धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि गौ-रक्षा और राम मंदिर के अधूरे उद्घाटन पर सवाल उठाने के कारण सरकार उन्हें प्रताड़ित कर रही है।
नोटिस में क्या है? प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के १४ अक्टूबर २०२२ के आदेश का हवाला देते हुए २४ घंटे में जवाब मांगा है। नोटिस के मुताबिक, ज्योतिष पीठ पर किसी का आधिकारिक पट्टाभिषेक नहीं हुआ है, इसलिए इस पद का उपयोग करना कोर्ट की अवहेलना है।
भड़का विपक्ष: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे ‘घोर निंदनीय’ बताते हुए कहा कि अहंकार किसी का नहीं बचता। वहीं कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो सरकार के गुणगान नहीं करते, उन्हें अपमानित किया जा रहा है। क्या अब गंगा स्नान के लिए भी भक्तों को अनुमति लेनी होगी?