क्या आरटीआई कानून में बड़े बदलाव के जरिए पारदर्शिता पर लगाम लगाने की तैयारी है

केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की समीक्षा करने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि गोपनीय सूचनाओं के प्रति ‘अनावश्यक जिज्ञासा’ और फाइलों के सार्वजनिक होने के डर से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार का सुझाव है कि नीति निर्धारण से जुड़ी ड्राफ्ट फाइलों और अधिकारियों की आंतरिक चर्चाओं को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए ताकि सरकारी कामकाज में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।
विपक्ष ने इस कदम को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता को खत्म कर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना चाहती है। विपक्षी दलों का कहना है कि आरटीआई कानून को कमजोर करने से सरकारी जवाबदेही खत्म हो जाएगी। पहले से ही लंबित हजारों आवेदनों और सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।