बजट में खादी और हैंडलूम की चांदी! ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ से कारीगरों के आएंगे अच्छे दिन

खादी और हस्तशिल्प को मिलेगी वैश्विक पहचान, वित्त मंत्री ने बुनकरों और कारीगरों के लिए खोला खजाना

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भारत के पारंपरिक वस्त्र उद्योग की तस्वीर बदलने के लिए कई बड़े और महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं। सरकार का मुख्य फोकस खादी, हस्तशिल्प और हथकरघा सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। बजट में ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल’ शुरू करने की घोषणा की गई है, जो सीधे तौर पर जमीनी स्तर के कारीगरों को बाजार से जोड़ेगी।

कपड़ा उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों और बुनकरों के लिए सरकार ने ‘Textile Labour Incentive Scheme’ का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत न केवल रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, ‘नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स प्रोग्राम’ के जरिए बुनकरों को बेहतर तकनीक, नया डिजाइन सपोर्ट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘Tax-Eco Initiative’ की घोषणा की गई है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ कपड़ों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगी। युवाओं के कौशल विकास के लिए ‘Samarth 2.0’ लॉन्च किया जाएगा, जिसमें उन्हें आधुनिक टेक्सटाइल स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा, वित्त मंत्री ने रेशम, ऊन और जूट के लिए ‘राष्ट्रीय फाइबर योजना’ और देश भर में ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इन पार्कों के बनने से बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और भारत एक ग्लोबल टेक्सटाइल हब के रूप में उभरेगा।

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