चीन की बादशाहत होगी खत्म! ओड़िशा, तमिलनाडु और आंध्र में खुलेगा ‘खनिजों का खजाना’

बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार ने ओड़िशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को मिलाकर एक ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ विकसित करने का निर्णय लिया है। इन राज्यों में विशेष खनिज पार्क और प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, ताकि भविष्य की तकनीकों के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
क्यों खास है ‘रेयर अर्थ’ (Rare Earth)? ये 17 अद्वितीय खनिजों का एक समूह है, जो आधुनिक दुनिया की रीढ़ हैं। आपके स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मोटर, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार और सेमीकंडक्टर तक, सब कुछ इन्हीं पर निर्भर है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 90% हिस्सा चीन से आयात करता है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम है।
इन्हीं 3 राज्यों को क्यों चुना गया? ओड़िशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के चयन के पीछे एक ठोस वैज्ञानिक कारण है—इनकी तटीय रेत में पाया जाने वाला ‘मोनाजाइट’ (Monazite) खनिज।
- प्राकृतिक भंडार: आंध्र प्रदेश की 974 किमी लंबी तटरेखा और ओड़िशा-तमिलनाडु के तट मोनाजाइट से समृद्ध हैं, जो रेयर अर्थ का सबसे बड़ा स्रोत है।
- आसान परिवहन: तटीय राज्य होने के कारण बंदरगाहों के जरिए कच्चे माल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बेहद सस्ता और सुगम हो जाता है।
- सुरक्षा और तकनीक: भारत सरकार अब केवल खनन ही नहीं, बल्कि इन धातुओं को रिफाइन करने में भी महारत हासिल करना चाहती है।
इस फैसले से न केवल रक्षा क्षेत्र मजबूत होगा, बल्कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन भी सस्ते होंगे क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले स्थायी चुंबक अब भारत में ही बनेंगे। यह कदम अगले 20 वर्षों के लिए भारत की वैश्विक स्थिति को बदलने वाला साबित होगा।