Budget 2026: पहली बुलेट ट्रेन का ठिकाना नहीं, वित्त मंत्री ने कर दिया 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का ऐलान!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वाकांक्षी विजन पेश किया। उन्होंने देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए सात नए ‘हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर’ विकसित करने की घोषणा की है। इन कॉरिडोर को सरकार ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के रूप में देख रही है, जिसका उद्देश्य यात्रा के समय को कम करना, कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। हालांकि, इन भव्य घोषणाओं के बीच हकीकत की तस्वीर कुछ धुंधली नजर आ रही है।

इतिहास पर नजर डालें तो, 14 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी थी। आज लगभग नौ साल बीत जाने के बाद भी भारत की पहली बुलेट ट्रेन का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। अब इसके 2029 तक शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब एक प्रोजेक्ट को पूरा होने में एक दशक से ज्यादा का समय लग रहा है, तो इन सात नए कॉरिडोर को जमीन पर उतारने में कितने दशक लगेंगे?

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि ये कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ेंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी और सड़कों व हवाई अड्डों पर भीड़ कम होगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल फंडिंग का है। वित्त मंत्री ने अभी तक इस पूरी योजना के लिए आवश्यक बजट आवंटन का खुलासा नहीं किया है। बिना ठोस वित्तीय योजना के ये सात कॉरिडोर केवल एक चुनावी घोषणा बनकर न रह जाएं, इसे लेकर विशेषज्ञ चिंतित हैं। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से संबंधित शहरों का बुनियादी ढांचा तो सुधरेगा, लेकिन इसकी समयसीमा और क्रियान्वयन की सुस्त रफ्तार सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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