ऑटिज्म के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अब लापरवाही पर होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को अनैतिक और वैज्ञानिक प्रमाणों से रहित करार दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त डेटा के इस थेरेपी का व्यावसायिक इस्तेमाल मेडिकल लापरवाही की श्रेणी में आएगा। कोर्ट के अनुसार, इसे केवल निगरानी वाले क्लीनिकल ट्रायल के लिए ही अनुमति दी जा सकती है, नियमित उपचार के तौर पर नहीं।
अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एम्स और नेशनल मेडिकल काउंसिल के साथ मिलकर इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश तैयार करे। वर्तमान में थेरेपी ले रहे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें चार सप्ताह के भीतर अधिकृत संस्थानों में स्थानांतरित करने को कहा गया है। अदालत ने जोर देकर कहा कि मरीजों द्वारा दी गई सहमति तब तक वैध नहीं मानी जाएगी जब तक उन्हें इसके प्रभावों की पूरी जानकारी न हो।