2026-27 बजट पर दक्षिण का विद्रोह! तमिलनाडु और केरल के साथ ‘विश्वासघात’ का आरोप, डीएमके और माकपा ने घेरा केंद्र को

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए वित्त वर्ष २०२६-२७ के बजट को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में नाराजगी की लहर दौड़ गई है। डीएमके और सीपीआई(एम) के प्रमुख नेताओं ने रविवार को इस बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “दूरदर्शिताहीन” और “विश्वासघाती” दस्तावेज करार दिया। उनका आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनावों के बावजूद केंद्र ने तमिलनाडु और केरल की जरूरतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है।

डीएमके सांसद कनिमोझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह बजट केवल निराशा का पुलिंदा है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद तमिलनाडु को जानबूझकर दरकिनार किया गया है।” वहीं, मदुरै से माकपा सांसद सु वेंकटेशन ने इसे अब तक का “सबसे खराब बजट” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार दक्षिण राज्यों की आकांक्षाओं के प्रति उदासीन है।

वेंकटेशन ने विशेष रूप से चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद को जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा तो की, लेकिन कोयंबटूर और मदुरै मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संपदा के दोहन के लिए कॉरिडोर बनाना राज्यों के अधिकारों को छीनने की साजिश है। साथ ही, सिद्ध औषधि और किझाड़ी (केलाड़ी) पुरातात्विक स्थलों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए गए। विपक्षी नेताओं के अनुसार, यह बजट सहकारी संघवाद की अवधारणा को नष्ट कर रहा है।

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