आम जनता को बजट में मिला ठगा सा अहसास रक्षा और निजीकरण पर बढ़ा सरकार का जोर

आम जनता को बजट में मिला ठगा सा अहसास रक्षा और निजीकरण पर बढ़ा सरकार का जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया वर्ष २०२६ का बजट आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। करदाताओं से २८ लाख करोड़ रुपये वसूलने के बावजूद आयकर स्लैब में कोई राहत नहीं दी गई है, जबकि विदेशी कंपनियों और एनआरआई को विशेष छूट मिली है। बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए ठोस नीति के बजाय सरकार ने विनिवेश का लक्ष्य बढ़ाकर ८० हजार करोड़ रुपये कर दिया है।

रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाकर ७.८६ लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, लेकिन इसके लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बजट में भारी कटौती की गई है। हालांकि बुनियादी ढांचे और १०० दिनों के रोजगार योजना (मनरेगा) के लिए धन आवंटित किया गया है, लेकिन बढ़ती महंगाई और घटती बचत के बीच यह बजट मध्यम वर्ग के लिए राहत के बजाय चिंता का विषय अधिक नजर आ रहा है।

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