परंपरागत खेती छोड़ अपनाया ‘लेमन फॉर्मूला’, गया के रामसेवक की सफलता देख हर कोई हैरान

बिहार के गया जिले के डोभी ब्लॉक स्थित केसापी गांव के एक प्रगतिशील किसान रामसेवक प्रसाद ने खेती-किसानी की परिभाषा बदल दी है। जहां आज के समय में कई किसान खेती को घाटे का सौदा मानते हैं, वहीं रामसेवक ने अपनी कुशलता से इसे एक मुनाफे वाले बिजनेस में तब्दील कर दिया है। उन्होंने अपनी मात्र 20 फीसदी जमीन पर 10 नींबू के पेड़ लगाए हैं, जो आज उन्हें सालाना 3 लाख रुपये तक की शुद्ध आय दे रहे हैं।

रामसेवक की इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘जीरो बजट’ और पूरी तरह से जैविक (Organic) प्रकृति है। वे अपने बगीचे में किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं करते हैं। उन्होंने एक मित्र से प्रेरित होकर बीजों से इन पौधों को तैयार किया था। करीब चार साल की मेहनत के बाद जब पेड़ों में फल आने शुरू हुए, तो पैदावार ने सबको चौंका दिया। आज स्थिति यह है कि एक अकेला पेड़ उन्हें साल भर में 25,000 से 30,000 रुपये की कमाई करके दे रहा है।

इन नींबूओं की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि फल पकने के बाद खुद-ब-खुद पेड़ से गिर जाते हैं। बाजार में इन आर्गेनिक नींबूओं की भारी मांग है। रामसेवक बताते हैं कि इस खेती में लागत ना के बराबर है और मुनाफा कई गुना ज्यादा। अपनी इस कामयाबी को देखते हुए अब वे इसका विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने अपनी अतिरिक्त 40 फीसदी जमीन पर 50 नए नींबू के पौधे लगाए हैं। रामसेवक प्रसाद आज उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *