मृत बेटी की याद में बना मंदिर! टॉलीगंज की ‘करुणामयी’ काली का 250 साल पुराना रहस्यमयी इतिहास

कोलकाता के टॉलीगंज इलाके की हलचल के बीच स्थित ‘करुणामयी काली मंदिर’ सिर्फ एक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह एक पिता के अपनी बेटी के प्रति असीम प्रेम का प्रतीक है। लगभग 250 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही भावुक करने वाला भी।
इतिहास की दर्दभरी दास्तां: 18वीं शताब्दी के मध्य में, सवर्ण रायचौधरी परिवार के जमींदार नंददुलाल रायचौधरी की इकलौती बेटी ‘करुणामयी’ का असामयिक निधन हो गया था। संतान को खोने के गम में नंददुलाल पूरी तरह टूट चुके थे। लोककथाओं के अनुसार, एक रात उन्हें स्वप्न में देवी काली के दर्शन हुए। देवी ने उन्हें एक विशेष कसौटी पत्थर (Kasti Pathar) के बारे में बताया और मंदिर स्थापना का निर्देश दिया।
बेटी के नाम पर देवी का नाम: अगले ही दिन जमींदार ने उस पत्थर को खोज निकाला और उसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। अपनी दिवंगत बेटी की याद को अमर करने के लिए उन्होंने देवी का नाम ‘करुणामयी’ रखा। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ देवी का रूप डरावना या उग्र नहीं, बल्कि एक ममतामयी बेटी जैसा शांत और सौम्य है।
रहस्यमयी मान्यताएं: स्थानीय लोगों का मानना है कि यहाँ मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। लेकिन आस्था के साथ-साथ यहाँ कुछ रहस्यमयी कहानियाँ भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि अमावस्या की रात को मंदिर परिसर में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है। कुछ पुराने लोगों का दावा है कि आधी रात को मंदिर से घुंघरुओं की हल्की आवाज सुनाई देती है, मानो वह बेटी आज भी वहां मौजूद हो। आज भी यह मंदिर कोलकाता की विरासत का एक अटूट हिस्सा बना हुआ है।