आरोग्य सेतु बनाने वाली अफसर अब ममता के निशाने पर, अभिषेक बनर्जी ने दी सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया नाम ‘सीमा खन्ना’ सुर्खियों में है। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस महिला अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर ममता बनर्जी ने विस्फोटक आरोप लगाते हुए कहा कि सीमा खन्ना ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर ५८ लाख वोटरों के नाम सूची से हटा दिए हैं।

ममता और अभिषेक के गंभीर आरोप: ममता बनर्जी का कहना है कि सीमा खन्ना चुनाव आयोग की स्थायी सदस्य नहीं हैं, बल्कि वे भाजपा के आईटी सेल के इशारे पर काम कर रही हैं। इससे पहले दिसंबर में अभिषेक बनर्जी ने भी सीमा खन्ना की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अभिषेक का दावा था कि उनके पास ऐसे स्क्रीनशॉट हैं जो साबित करते हैं कि चुनाव आयोग के ऐप में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है।

कौन हैं सीमा खन्ना? सीमा खन्ना भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) में उप महानिदेशक और संचालन निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। मूल रूप से बिहार की रहने वाली सीमा के पास २५ वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है। उन्होंने पटना के नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक किया और फिर दिल्ली से पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री ली।

दिलचस्प बात यह है कि सीमा खन्ना वही अधिकारी हैं जिन्होंने कोरोना काल में प्रसिद्ध ‘आरोग्य सेतु’ ऐप बनाया था। वे भारत की साइबर सुरक्षा नीतियों को तैयार करने वाली मुख्य टीम की सदस्य भी हैं। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस उन पर चुनावी हेरफेर का आरोप लगा रही है, वहीं सरकारी गलियारों में उन्हें एक बेहद कुशल और सम्मानित अधिकारी माना जाता है। अब देखना यह है कि बंगाल की राजनीति का यह ‘सीमा विवाद’ कहां जाकर थमता है।

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