“कानून मानो वरना देश छोड़ो!” व्हाट्सएप-मेटा पर भड़के सीजेआई सूर्यकांत, दे डाली भारत छोड़ने की चेतावनी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने व्हाट्सएप-मेटा डेटा शेयरिंग मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए टेक कंपनियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। नागरिकों की गोपनीयता पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि किसी भी कीमत पर प्राइवेसी के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। सीजेआई ने मेटा को दो टूक शब्दों में कहा, “अगर कोई कंपनी भारत के संविधान और कानूनों का पालन नहीं कर सकती, तो उसके लिए रास्ता बिल्कुल साफ है— वे भारत छोड़कर जा सकते हैं।”
सीजेआई का गुस्सा और मेटा की दलील: सुनवाई के दौरान जब मेटा के वकील ने ‘ऑप्ट-आउट’ विकल्प के पक्ष में दलील दी, तो मुख्य न्यायाधीश नाराज हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह किसी यूजर के सेवा छोड़ने और फिर भी उनका डेटा साझा करने का विकल्प है? अदालत ने कठोरता से कहा, “हम आपको भारतीय नागरिकों के बारे में एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे।” कोर्ट ने मेटा को डेटा साझा न करने के लिए एक स्पष्ट हलफनामा (Uundertaking) देने का निर्देश दिया है।
जुर्माना बरकरार और सख्त निर्देश: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए जुर्माने पर भी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि मेटा द्वारा जमा किया गया जुर्माना फिलहाल बरकरार रहेगा और इसे वापस नहीं लिया जाएगा। सभी पक्षों को अपनी दलीलें पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। संदेश बिल्कुल स्पष्ट है: भारत में व्यापार करने वाली किसी भी टेक कंपनी को यहां के नागरिकों के डिजिटल अधिकारों का सम्मान करना ही होगा।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें: यह मामला अब तीन जजों की विशेष बेंच के पास है। भविष्य में विदेशी कंपनियां भारतीय ग्राहकों के डेटा को कैसे हैंडल करेंगी, इसका फैसला इसी केस से होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख दिखाता है कि भारत सरकार और न्यायपालिका डेटा सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। अगली सुनवाई में इस पर एक ऐतिहासिक फैसला आने की उम्मीद है।