Deepfake पर मोदी सरकार का सर्जिकल स्ट्राइक! सोशल मीडिया से ३ घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक के बढ़ते खतरों को देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए और कड़े आईटी नियम लागू कर दिए हैं। मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, २०२१ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन नए नियमों के तहत अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय कर दी गई है।

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई आपत्तिजनक या भ्रामक डीपफेक सामग्री पाई जाती है, तो उसे रिपोर्ट किए जाने के ३ घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। यह कदम भ्रामक सूचनाओं को वायरल होने से रोकने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, अब एआई द्वारा निर्मित हर सामग्री पर एक स्पष्ट और स्थायी लेबल लगाना होगा। सरकार ने निर्देश दिया है कि विजुअल कंटेंट के लिए इमेज का कम से कम १० प्रतिशत हिस्सा लेबल से कवर होना चाहिए, जबकि ऑडियो या वीडियो में क्लिप के शुरुआती १० प्रतिशत हिस्से में यह जानकारी देना जरूरी होगा कि कंटेंट एआई-जनित है।

इन नियमों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब प्लेटफॉर्म्स को ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करना होगा ताकि यौन शोषणकारी या अवैध एआई कंटेंट को जनता तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक किया जा सके। हर तीन महीने में उपयोगकर्ताओं को इन नियमों के उल्लंघन पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में सचेत किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि डिजिटल दुनिया में अब स्वैच्छिक खुलासा नहीं, बल्कि अनिवार्य पारदर्शिता ही एकमात्र विकल्प है। इन नियमों के आने से अब आम लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट के बीच फर्क करना आसान हो जाएगा।

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