सिस्टम की भेंट चढ़ी तीन जिंदगियां! युवराज, कमल और अब बिरजू; दिल्ली-NCR में मौत बांट रहे खुले मैनहोल

दिल्ली और एनसीआर (NCR) के इलाकों में व्यवस्था की खामियां अब जानलेवा साबित हो रही हैं। पिछले एक महीने के भीतर तीन अलग-अलग घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि आम आदमी की जान की कीमत सिस्टम की नजर में कुछ भी नहीं है। युवराज मेहता, कमल ध्यानी और बिरजू—इन तीनों की मौत का कारण अलग-अलग जगहें जरूर थीं, लेकिन जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है।
खूनी मैनहोल और सिस्टम की सुस्ती रोहिणी सेक्टर 32 में खुले मैनहोल में गिरने से बिरजू की मौत ने एक बार फिर राजधानी को दहला दिया है। सोमवार रात को गिरे बिरजू का शव 24 घंटे बाद निकाला जा सका। इससे पहले 6 फरवरी को जनकपुरी में बैंक कर्मी कमल ध्यानी अपनी बाइक समेत वॉटर बोर्ड के गड्ढे में समा गए थे। वहीं, 16 जनवरी को नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान एक निर्माणाधीन बेसमेंट में डूबने से चली गई थी।
बिरजू की मौत में नया मोड़ बिहार के रहने वाले और पेशे से बढ़ई बिरजू की मौत अब महज एक दुर्घटना नहीं लग रही है। टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बिरजू के दोस्त राम ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। राम के अनुसार, बिरजू के साथ मौजूद सूरज ने पहले अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी और बाद में सीवर में गिरने की बात कबूली। सूरज के चेहरे पर चोट के निशान व्यक्तिगत रंजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही और निजी दुश्मनी का मिला-जुला परिणाम है? दिल्ली पुलिस अब इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
हादसे के बाद जागी नींद विडंबना देखिए कि बिरजू की मौत के तुरंत बाद प्रशासन ने रातों-रात इलाके के सभी खुले मैनहोलों को ढक दिया। सवाल यह है कि क्या यह काम पहले नहीं किया जा सकता था? क्या प्रशासन केवल किसी की मौत का इंतजार करता है? जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक मासूमों की जान ऐसे ही गड्ढों और नालों में जाती रहेगी।