प्रमोशन चाहिए तो पास करनी होगी TET! सुप्रीम कोर्ट ने तय की समय सीमा, शिक्षकों में हड़कंप

पुराने शिक्षकों के बीच लंबे समय से चल रहे इस बड़े सवाल का जवाब आखिरकार मिल गया है कि क्या उन्हें फिर से टीईटी (TET) पास करनी होगी? खासकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। लोकसभा में केंद्र के जवाब और शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुसार, अब पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए TET पास करना एक अनिवार्य योग्यता बन गई है।

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act, 2009) और NCTE के 2010 के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षक की नौकरी बनाए रखने के लिए TET एक ‘अनिवार्य योग्यता’ है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें अगले 2 वर्षों के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, जो शिक्षक अगले 5 वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है।

अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि पदोन्नति (Promotion) के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बिना टीईटी योग्यता के किसी भी शिक्षक को पदोन्नत नहीं किया जाएगा, चाहे उनका अनुभव कितना भी क्यों न हो। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का अक्षरशः पालन करेंगे और 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए कोई अलग राष्ट्रीय नीति नहीं बनाई जाएगी। अब कार्यरत शिक्षकों के पास अपनी नौकरी और भविष्य सुरक्षित करने के लिए परीक्षा पास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

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